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- ‘हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है' पंक्ति में कवि ने जीवन का कौन-सा यथार्थ प्रस्तुत किया 'हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है' पंक्ति के माध्यम से कवि जीवन के उस यथार्थ को बताना चाहता है कि हर सुख में दुख छिपा है क्योंकि चंद्रि... 1
- ‘छाया मत छूना' कविता का कवि कठिन यथार्थ के पूजन को श्रेयस्कर क्यों मानता है? कविता 'छाया मत छूना' में कवि गिरिजा कुमार जी यथार्थ के पूजन को इसलिए श्रेयस्कर मानते हैं। क्योंकि यथार्थ का सामना करके ही व्यक्ति जीवन को सफ... 1
- ‘जीवन में हैं सुरंग सुधियाँ सुहावनी' से 'छाया मत छूना' कविता के कवि का अभिप्राय जीवन की किन मधुर स्मृतियों से है? ‘जीवन में हैं सुरंग सुधियाँ सुहावनी' से 'छाया मत छूना’ कविता के कवि का अभिप्राय जीवन में अपनी प्रिया के साथ व्यतीत किए गए सुखद क्षणों से है।... 1
- 'छाया' से क्या तात्पर्य है? कवि उसे छूने से मना क्यों करता है? कविता 'छाया मत छूना' में 'छाया' से तात्पर्य अतीत के उन सुखों से है जो कवि को कभी प्राप्त नहीं हुए। अप्राप्य के पीछे भागना और उसकी याद में खो... 1
- ‘छाया मत छूना' कविता के आधार पर दुख के कारण बताइए। कवि 'गिरिजा कुमार माथुर' द्वारा रचित कविता ‘छाया मत छूना' में दुख के निम्नलिखित कारण बताए है- (i) व्यक्ति अतीत की यादों में खोया रहता है और... 1
- मृगतृष्णा' से क्या तात्पर्य है? उसके पीछे क्यों नहीं भागना चाहिए? मृगतृष्णा शब्द का अर्थ है कि जिस प्रकार एक मृग रेगिस्तान में रेत पर तेज़ धूप पड़ने पर वहाँ पानी होने के भ्रम में उसके पीछे भागता है, पर वहाँ... 1
- मनुष्य अतीत में खोए रहने के कारण दुखी रहता है। आपके विचार में दुख के और क्या कारण हो सकते हैं? अतीत में खोए रहने के कारण दुखी रहना मानव प्रकृति है जो कि उचित नहीं है। उससे हम अपने वर्तमान व भविष्य को भी नहीं सँवार पाते। मानव के दुखी रह... 1
- ‘क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?'- का क्या भाव है? “क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर पंक्ति का भाव यह है कि जिस प्रकार बसंत ऋतु में फूल न खिले तो वह सुखदायी प्रतीत नहीं होती, वैसे ही मनुष... 2
- ‘मृगतृष्णा' किसे कहते हैं? 'छाया मत छूना' कविता में इसका प्रयोग किस अर्थ में हुआ है? गर्मियों में प्यास से व्याकुल मृग को रेगिस्तान में थोड़ी दूरी पर पानी होने का भ्रम होता है, किंतु पास जाने पर केवल रेत-ही-रेत दिखाई देता है... 1
- कवि ने ‘छाया मत छूना' कविता में कठिन यथार्थ के पूजन की बात क्यों की है? कवि गिरिजा कुमार माथुर ने कविता 'छाया मत छूना' में यथार्थ को पूजने की बात इसलिए कही है। क्योंकि वर्तमान समय में वास्तविकताओं का सामना करके ह... 1
- छाया मत छूना' में कवि 'छाया' किसे कहता है और क्यों? कवि गिरिजा कुमार माथुर 'छाया' विगत समय में बीती हुई स्मृतियों को कहते हैं, जो अनेक बार वर्तमान समय में भी मानव-मस्तिष्क में छाई रहती हैं। ये... 1
- माँ ने बेटी को क्या-क्या सीख दी? माँ ने बेटी को सीख देते हुए कहा कि उसे कभी भी अपनी सुंदरता पर रीझना नहीं चाहिए क्योंकि वह उसकी कमजोरी बन जाएगी। माँ ने उसे यह भी सीख दी कि उ... 1
- माँ को अपनी बेटी अंतिम पूँजी क्यों लग रही थी? माँ को अपनी बेटी सच्ची सहेली की भाँति लगती है क्योंकि वह उसके हर सुख दुख की साथी होती है। माँ बेटी के साथ हर प्रकार की बात कर लेती है। बेटी... 1
- "पाठिका थी वह धुँधले प्रकाश की, कुछ तुकों और कुछ लयबद्ध पंक्तियों की" इन पंक्तियों को पढ़कर लड़की की लड़कियाँ सरल स्वभाव की होती है वह छल कपट पूर्ण व्यवहार को नहीं जानती। वह समाज के अनुभवों से अनभिज्ञ होती है। माँ अपने जीवन में प्राप्त अनुभव... 1
- ' आग रोटियाँ सेंकने के लिए है, जलने के लिए नहीं ' क) इन पंक्तियों में समाज में स्त्री के किस स्थिति की ओर क) इन पंक्तियों में समाज में स्त्री के किस स्थिति की ओर संकेत किया गया है? इन पंक्तियों में कवि ने समाज में विवाहित नारी की दशा की ओर संकेत... 1
- आपके विचार से माँ ने ऐसा क्यों कहा कि लड़की होना पर लड़की जैसी दिखाई मत देना? माँ के इन शब्दों में लाक्षणिकता विद्यमान है। लड़की होने का तात्पर्य है कि उसमें कोमलता, सुंदरता, सहनशीलता, ममता, माधुर्यता आदि स्वाभाविक गुण... 1
- कविता में व्यक्त दुख के कारणों को स्पष्ट कीजिए। इस कविता में दुख का कारण अतीत की सुखद यादों को बताया गया है। मनुष्य के जीवन में जब थोड़ा सा भी दुख आता है तो वह वर्तमान जीवन की तुलना अतीत स... 1
- मृगतृष्णा किसे कहते हैं, कविता में इसका प्रयोग किस अर्थ में हुआ है? मृगतृष्णा का साधारण अर्थ है भ्रम या धोखा। गर्मी के मौसम में सूर्य की किरणें रेगिस्तान की रेत पर चमकता हुआ जल प्रतीत होती हैं और प्यासा मृग ध... 1
- छाया शब्द यहाँ किस संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है? कवि ने उसे छूने के लिए क्यों मना किया है? कविता में छाया शब्द अतीत की यादों के लिए प्रयोग हुआ है जो अब वास्तविकता से दूर हो गई हैं। इसलिए अतीत अर्थात स्मृतियों रूपी छायाएँ अनुभव करने... 1
- भाव स्पष्ट कीजिए प्रभुता का शरण-बिंब केवल मृगतृष्णा है,हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है। अपने भूतकाल की कीर्तियों पर किसी बड़प्पन का अहसास किसी मृगमरीचिका की तरह है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हर चाँद के पीछे एक काली रात छिपी होत... 1
- कवि ने कठिन यथार्थ के पूजन की बात क्यों कही है? यथार्थ का पूजन करके अर्थात यथार्थ को स्वीकार करके ही मनुष्य जीवन में आगे बढ़ा जा सकता है। मनुष्य को वास्तविकता का सामना करना पड़ता है। मनुष्... 1
- भाव स्पष्ट कीजिए -रूपांतरण है सूरज की किरणों कासिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का! प्रस्तुत पंक्तियों का तात्पर्य यह है कि फसल के लिए सूरज की किरणें तथा हवा दोनों का प्रमुख योगदान है। वातावरण के ये दोनों अवयव ही फसल के योगद... 1
- फसल को 'हाथों के स्पर्श की गरिमा' और 'महिमा' कहकर कवि क्या व्यक्त करना चाहता है? कवि बताना चाहता है कि फसल पैदा करने के लिए घर के सभी व्यक्तियों को परिश्रम करना पड़ता है। किसान का पूरा परिवार फसल को उत्पन्न करने में जुटा... 1
- कविता में फसल उपजाने के लिए आवश्यक तत्वों की बात कही गई है। वे आवश्यक तत्व कौन कौन से हैं? कवि के अनुसार फसल के आवश्यक तत्व हवा, पानी, मिट्टी, बीज, खाद्य, सूर्य की किरणें आदि हैं। 2