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2. (अ) निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए : (6 अंक)चाहे सभी सुमन बिक जाएँ चाहे ये उपवन बिक जाएँचाहे सौ फागुन बिक जाएँ पर मैं गंध नहीं बेचूँगा।अपनी गंध नहीं बेचूँगा।।जिस डाली ने गोद खिलाया जिस कोंपल ने दी अरुणाईलछमन जै…

2. (अ) निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए : (6 अंक)

चाहे सभी सुमन बिक जाएँ चाहे ये उपवन बिक जाएँ
चाहे सौ फागुन बिक जाएँ पर मैं गंध नहीं बेचूँगा।
अपनी गंध नहीं बेचूँगा।।

जिस डाली ने गोद खिलाया जिस कोंपल ने दी अरुणाई
लछमन जैसी चौकी देकर जिन काँटों ने जान बचाई
इनको पहिला हक आता है चाहे मुझको नोचें-तोड़ें
चाहे जिस मालिन से मेरी पँखुरियों के रिश्ते जोड़ें
ओ मुझपर मंडराने वालो मेरा मोल लगाने वालो
जो मेरा संस्कार बन गई वो सौंगध नहीं बेचूँगा।
अपनी गंध नहीं बेचूँगा।।

(1) उत्तर लिखिए : (2)
(i) पद्यांश में उल्लेखित : [ संख्या – ........ ] [ महीना – ........ ] (1)
(ii) फूल को नोचने-तोड़ने का अधिकार इन्हें है : [ ........ ] [ ........ ] (1)

(2) (i) निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द पद्यांश से ढूँढकर लिखिए : (1)
(1) दुर्गंध × ........ (2) पराई × ........
(ii) वचन पहचानकर लिखिए : (1)
(1) काँटे – ........ (2) डाली – ........

(3) उपर्युक्त पद्यांश की प्रथम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)

1 answer

Best answer

(1) (i) संख्या – सौ; महीना – फागुन
(ii) डाली-कोंपल तथा काँटे

(2) (i) (1) दुर्गंध × गंध (2) पराई × अपनी
(ii) (1) काँटे – बहुवचन (2) डाली – एकवचन

(3) कवि कहते हैं कि संसार के सारे फूल, बगीचे और सौ फागुन (ऋतुएँ) बिक जाएँ, कोई बात नहीं; पर वे अपनी सुगंध नहीं बेचेंगे। अर्थात् चाहे सब कुछ खोना पड़े, पर अपने संस्कार, आत्मसम्मान और सच्चाई को कभी नहीं बेचेंगे।

Doubtly AI · 25 Oct 2026 AI-verified · Oct 2026 Report
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