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doubtly

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  1. क्योंकि वह सौगंध उसका संस्कार बन गई है; अपने संस्कार और स्वाभिमान को वह किसी कीमत पर नहीं बेच सकता ।
  2. क्योंकि मौसम तो आता-जाता रहता है; भँवरों का गुंजन, पतझड़ का रोना-धोना या पिचकारी का जादू-टोना — किसी भी परिस्थिति से उस पर कोई अंतर नहीं पड़ता ।
Doubtly AI · 25 Oct 2026 AI-verified · Oct 2026 Report
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