पंक्तियाँ : ‘किसी का हमने छीना नहीं, प्रकृति का रहा पालना यहीं’ और उसके बाद की पंक्ति।
भावार्थ : कवि कहता है कि भारतवासियों ने कभी किसी दूसरे देश या जाति का कुछ नहीं छीना। प्रकृति ने इसी भूमि पर हमारा पालन-पोषण किया। यही हमारी जन्मभूमि थी; हम कहीं बाहर से आकर यहाँ नहीं बसे। इन पंक्तियों में भारत की शांतिप्रियता और इस धरती से भारतीयों के गहरे, स्वाभाविक संबंध का गौरवपूर्ण वर्णन है।