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doubtly

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यदि मैं करामत अली की जगह पर होता तो मैं भी मित्र को दिए वचन को निभाता। लक्ष्मी बूढ़ी हो गई थी और दूध नहीं देती थी, फिर भी उसने बरसों हमारे परिवार को दूध दिया था। इसलिए मैं उसे कसाई या किसी व्यापारी को कभी न बेचता। घर के खर्च में थोड़ी कटौती करके उसके चारे की व्यवस्था करता और परिवार के सदस्यों को भी समझाता कि अनुपयोगी हो जाने पर भी प्राणियों का पालन करना ही मानवता है। अगर घर में रखना संभव न होता तो करामत अली की तरह उसे किसी अच्छी गौशाला में भरती कराता और समय-समय पर उससे मिलने जाता।

Doubtly AI · 25 Oct 2026 AI-verified · Oct 2026 Report
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