मैं मोती हूँ – एक पालतू कुत्ते की आत्मकथा
मेरा नाम मोती है। मेरा जन्म एक सड़क के किनारे हुआ था। जब मैं छोटा-सा पिल्ला था, एक बरसात की रात मैं ठंड से काँप रहा था। तभी स्कूल से लौटते हुए एक बच्चे, आदित्य, ने मुझे देखा और अपने घर ले आया। तब से वही घर मेरा घर है।
घर के सभी लोग मुझसे बहुत प्यार करते हैं। माँ जी मुझे रोज दूध-रोटी देती हैं और आदित्य शाम को मुझे घुमाने ले जाता है। मैं भी अपना कर्तव्य पूरी ईमानदारी से निभाता हूँ। रात को कोई अनजान व्यक्ति घर के पास आए तो भौंककर सबको सावधान कर देता हूँ।
एक बार मैं बहुत बीमार पड़ गया था। आदित्य के पिताजी मुझे तुरंत डॉक्टर के पास ले गए। पूरा परिवार मेरी चिंता करता रहा। उस दिन मुझे लगा कि मैं केवल एक जानवर नहीं, इस परिवार का सदस्य हूँ।
अब मैं थोड़ा बूढ़ा हो गया हूँ, पहले जैसा तेज नहीं दौड़ पाता, फिर भी इस परिवार का प्रेम कम नहीं हुआ। मैं सब मनुष्यों से इतना ही कहना चाहता हूँ कि हम जानवर बोल नहीं सकते, पर प्रेम और दर्द दोनों समझते हैं। हमें प्यार दीजिए, हम जीवन भर वफादारी निभाएँगे।