मीराबाई कहती हैं – हे हरि ! आपके बिना मेरी क्या गति है, मेरा और कोई सहारा नहीं है। आप मेरे पालनहार कहलाते हैं और मैं आपकी दासी हूँ। आरंभ से अंत तक मैं आपके ही नाम की माला फेरती हूँ। हे प्रभु ! मैं बार-बार पुकारकर कहती हूँ कि मुझे केवल आपकी ही लगन (व्याकुलता) है। यह संसार विकारों (बुराइयों) का सागर है और मैं उसके बीच घिर गई हूँ। मेरी जीवन रूपी नाव फट गई है; हे प्रभु ! इसमें पाल बाँध दीजिए, नहीं तो यह बेड़ा डूब रहा है। आपकी विरहिणी आपकी राह देख रही है, मुझे अपने पास रख लीजिए। दासी मीरा राम का नाम रटती है और कहती है – प्रभु, मैं आपकी शरण में हूँ।
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Doubtly AI
· 25 Oct 2026
AI-verified · Oct 2026
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