पुस्तक प्रदर्शनी में एक घंटा
पिछले रविवार हमारे शहर के टाउन हॉल में पुस्तक प्रदर्शनी लगी थी। मैं अपने मित्र के साथ वहाँ गया। प्रवेश करते ही रंग-बिरंगी पुस्तकों से सजे स्टॉल देखकर मन प्रसन्न हो गया। वहाँ कहानी, कविता, विज्ञान, इतिहास, जीवनी और बाल साहित्य की हजारों पुस्तकें थीं।
एक स्टॉल पर प्रेमचंद की कहानियाँ थीं तो दूसरे पर डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की ‘अग्नि की उड़ान’। बच्चों के लिए चित्रकथाएँ और विज्ञान के प्रयोगों की पुस्तकें भी थीं। विद्यार्थियों को पुस्तकों पर छूट मिल रही थी। एक कोने में लेखक से मुलाकात का कार्यक्रम चल रहा था।
मैंने दो पुस्तकें खरीदीं। एक घंटा कैसे बीत गया, पता ही नहीं चला। सच है, पुस्तकें हमारी सच्ची मित्र हैं।