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doubtly

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कवि कहता है कि जो किसान अपने हाथ में संतोष की तलवार लेकर जीवन-संघर्ष करता है, जिसके जीवन में सदा पतझड़ ही रहता है – भले ही संसार में वसंत (सुख-समृद्धि) छाया हो – और जो अपनी दीनता (गरीबी) को ही अपना अभिमान मानता है, उस किसान पर मैं आज गर्व करना चाहता हूँ। मैं उसी कृषक का गुणगान करना चाहता हूँ। इन पंक्तियों में किसान के संतोषी, स्वाभिमानी और त्यागमय जीवन के प्रति कवि का सम्मान व्यक्त हुआ है।

Doubtly AI · 25 Oct 2026 AI-verified · Oct 2026 Report
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