शीर्षक : सच्चा धर्म
एक छोटे-से गाँव में रामू नाम का एक गरीब किसान रहता था । उसके पास थोड़ी-सी जमीन और एक बैल था । एक वर्ष गाँव में भयंकर बाढ़ आई । नदी का पानी गाँव में घुस आया और लोग अपना सामान लेकर ऊँचे टीले की ओर भागने लगे ।
रामू भी अपने परिवार के साथ टीले की ओर जा रहा था । रास्ते में उसने देखा कि बूढ़ी शांता काकी अपनी झोंपड़ी में फँसी हैं और पानी तेजी से बढ़ रहा है । रामू की पत्नी ने कहा, ‘‘पहले अपने बच्चों को सुरक्षित पहुँचाओ ।’’ रामू ने बच्चों को पत्नी के साथ आगे भेजा और स्वयं कमर तक पानी में उतरकर काकी को कंधे पर उठाकर बाहर ले आया ।
इस बीच उसका बैल पानी में बह गया । गाँव वाले कहने लगे, ‘‘रामू, तुमने अपना नुकसान कर लिया ।’’ रामू मुसकराकर बोला, ‘‘बैल तो फिर आ जाएगा, पर किसी का जीवन बचाना सबसे बड़ा धर्म है ।’’
बाढ़ उतरने के बाद गाँव वालों ने मिलकर पैसे जमा किए और रामू को नया बैल खरीदकर दिया । शांता काकी ने उसे ढेरों आशीर्वाद दिए । पूरे गाँव में रामू का सम्मान बढ़ गया ।
सीख : दूसरों की भलाई करने के समान कोई धर्म नहीं है । परोपकार करने वाले का भला अवश्य होता है ।