शीर्षक : कागज का चाँद
एक जंगल में चिंटू नाम का एक नन्हा खरगोश रहता था । उसे रात में आकाश का चाँद बहुत अच्छा लगता था । वह रोज सोचता, ‘काश ! मैं चाँद को छू पाता ।’
एक दिन जंगल के पास की पगडंडी पर उसे एक सफेद कागज पड़ा मिला । चिंटू ने सोचा, ‘इससे मैं अपना चाँद बनाऊँगा ।’ उसने कागज को दाँतों से गोल काटा और उसे गीली मिट्टी के एक टीले पर चिपका दिया । रात में चाँदनी उस कागज पर पड़ी तो वह भी चमकने लगा । चिंटू खुशी से नाचने लगा ।
उसके मित्र गिलहरी और कछुआ आए । कछुए ने हँसकर कहा, ‘‘चिंटू, असली चाँद तो आकाश में है । यह तो उसकी रोशनी से चमक रहा है ।’’ चिंटू ने आकाश की ओर देखा और समझ गया कि चाँद दूर रहकर भी सबको रोशनी देता है ।
उस दिन से चिंटू ने तय किया कि वह भी चाँद की तरह सबकी मदद करेगा । जब बरसात में मिट्टी धँसने से गिलहरी का घर टूटा, तो चिंटू ने सबसे पहले उसकी मदद की ।
सीख : किसी चीज को पाने से अधिक महत्त्व उसके गुण अपनाने का है ।