कवि छापा मारने वाले अधिकारियों से व्यंग्य में कहते हैं कि जिन अमीरों के घरों में सोने-चाँदी के पलंग और सोफे हैं, उनका धन आप निकलवा लेते हैं — यह बहुत अच्छी बात है, अवश्य निकलवाइए । परंतु जिन गरीबों के घर में बैठने के लिए भी कुछ नहीं है, उनके यहाँ कम-से-कम एक तखत तो डलवा दीजिए ।
इन पंक्तियों द्वारा कवि ने आम आदमी की दयनीय आर्थिक स्थिति पर व्यंग्य किया है और यह सुझाव दिया है कि सरकार को केवल धन वसूलना ही नहीं, गरीबों की सहायता भी करनी चाहिए ।