‘सादा जीवन, उच्च विचार’ का अर्थ है कि रहन-सहन सरल और आवश्यकताएँ सीमित हों, पर विचार ऊँचे और नैतिक हों । सादगी से जीने वाला व्यक्ति दिखावे और फिजूलखर्ची से दूर रहता है, इसलिए उसे लोभ, ईर्ष्या और भ्रष्टाचार की ओर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती ।
लाल बहादुर शास्त्री जी इसका श्रेष्ठ उदाहरण हैं । प्रधानमंत्री होते हुए भी वे खादी के फटे कुरतों का उपयोग करते थे और सरकारी गाड़ी के निजी उपयोग का पैसा जमा करवाते थे । गांधीजी ने भी सादा जीवन अपनाकर देश को ऊँचे आदर्श दिए ।
आज के दिखावे के युग में हमें भी यह सिद्धांत अपनाना चाहिए । इससे मन को शांति मिलती है, समाज में सम्मान बढ़ता है और हम दूसरों के लिए प्रेरणा बनते हैं ।