इस कव्वाली में लड़कों और लड़कियों के दल अपने-अपने वीर ऐतिहासिक और पौराणिक पात्रों का गुणगान करके एक-दूसरे से बढ़-चढ़कर होने का दावा करते हैं । अंत में कवि यह संदेश देते हैं कि आपस में झगड़ने या शेखी बघारने से कुछ हासिल नहीं होता ।
लड़के और लड़कियाँ, स्त्री और पुरुष दोनों ही भारत माता की संतान हैं और भारत माता के रथ के दो पहिये हैं । दोनों समान हैं; दोनों के सहयोग और समानता से ही देश आगे बढ़ सकता है । हमें अपने देश के वीर-वीरांगनाओं पर गर्व करते हुए मिल-जुलकर रहना चाहिए ।