आज मोबाइल, ई-मेल और संदेश भेजने वाले ऐप के कारण हाथ से पत्र लिखने का चलन कम हो गया है । फिर भी पत्र लेखन का अपना अलग महत्त्व है । पत्र में लिखने वाला सोच-समझकर अपने मन की भावनाएँ विस्तार से व्यक्त करता है, इसलिए उसमें आत्मीयता और अपनापन होता है ।
पत्र वर्षों तक सँभालकर रखे जा सकते हैं और बार-बार पढ़े जा सकते हैं । काका कालेलकर जैसे महापुरुषों के पत्र आज भी हमें उनके विचारों और व्यक्तित्व से परिचित कराते हैं । पत्र लिखने से भाषा, लेखन-कौशल और विचारों की स्पष्टता भी बढ़ती है ।
इसलिए आधुनिक साधनों का उपयोग करते हुए भी हमें अपने प्रियजनों को कभी-कभी पत्र अवश्य लिखने चाहिए, ताकि यह सुंदर सिलसिला सदैव जारी रहे ।