- काकी के पति का देहांत हो चुका था और बेटे भी चल बसे थे; एक भतीजे के सिवाय उनका और कोई न था, और भतीजे ने लिखाते समय लंबे-चौड़े वादे किए थे ।
- वह अपने हिस्से की पूड़ियाँ बूढ़ी काकी को खिलाना चाहती थी, क्योंकि काकी को किसी ने भोजन नहीं दिया था ।
- काकी रेंगती हुई मेहमानों के बीच जा पहुँची थीं, जिससे बुद्धिराम क्रोध से तिलमिला उठे ।
- वे इस गँवार मंडली में बोलना अथवा सम्मिलित होना अपनी प्रतिष्ठा के प्रतिकूल समझते थे ।
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Doubtly AI
· 25 Oct 2026
AI-verified · Oct 2026
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