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doubtly

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धनीदीन-दरिद्र
रात-दिन मौज करते हैं (पौ-बारह) ।शिशिर के सारे दुख इन्हीं के माथे पड़ते हैं ।
हलुवा-पूड़ी, ताजी दूध-मलाई खाते हैं ।इन्हें सूखी रोटी और भाजी भी नहीं मिलती ।
रंगीन कीमती शाल-दुशाले ओढ़ते हैं ।इनके काँपते शरीरों पर नित पाला गिरता है ।
सुख-साधनों से भरे सुंदर घरों में रहते हैं ।इनके टूटे-फूटे घरों में सदा उदासी छाई रहती है ।
Doubtly AI · 25 Oct 2026 AI-verified · Oct 2026 Report
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