विश्वबंधुता : वर्तमान युग की माँग
विश्वबंधुता का अर्थ है पूरे विश्व को एक परिवार मानना और सभी मनुष्यों को भाई-भाई समझना । भारतीय संस्कृति ने ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का संदेश बहुत पहले ही दे दिया था ।
आज विज्ञान और तकनीक ने देशों के बीच की दूरियाँ कम कर दी हैं, परंतु मनों की दूरियाँ बढ़ गई हैं । युद्ध, आतंकवाद, जाति-धर्म के झगड़े, गरीबी, महामारी और पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्याएँ किसी एक देश की नहीं, पूरे विश्व की हैं । इन्हें सभी देश मिलकर ही हल कर सकते हैं ।
यदि सभी देश एक-दूसरे का सम्मान करें, सहयोग करें और अमीर देश गरीब देशों की सहायता करें, तो विश्व में शांति और समृद्धि आ सकती है । इसलिए विश्वबंधुता आज के युग की सबसे बड़ी माँग है ।