10th
- The speed of light in a vacuum is 299,792,458 meters per second.
- सफलता के चरम शिखर पर पहुँचने के दौरान यदि व्यक्ति लड़खड़ाते हैं तब उसे सहयोगी किस तरह संभालते हैं? सफलता के चरम शिखर पर पहुँचने के दौरान यदि व्यक्ति लड़खड़ाते हैं। तो उसके सहयोगी उसे मानसिक तौर पर सहारा देने हेतु अपनी सहानुभूति देते हैं। उ... 1
- कभी कभी तारसप्तक की ऊँचाई पर पहुँचकर मुख्य गायक का स्वर बिखरता नजर आता है उस समय संगतकार संगतकर की प्रमुख भूमिका यह है कि वह मुख्य गायक का पूरा सहयोग करता है जब भी उसका स्वर टूटने लगता है तो संगतकार उसकी आवाज में अपनी आवाज मिला क... 1
- किसी भी क्षेत्र में प्रसिद्धि पाने वाले लोगों को अनेक लोग तरह तरह से अपना योगदान देते हैं। समाज में ऐसे अनेक उदाहरण मिल जाते हैं। हम विद्यालय का उदाहरण ले सकते हैं। विद्यालय को विकास के पथ पर ले जाने का श्रेय प्रधानाचार्य को मिलता... 1
- भाव स्पष्ट कीजिए- और उसकी आवाज में जो एक हिचक साफ सुनाई देती है इन सारी प्रक्रिया के दौरान संगतकार की आवाज हमेशा दबी हुई होती है। ज्यादातर लोग इसे उसकी कमजोरी मान लेते होंगे। लेकिन ऐसा नहीं है। वह तो गायक... 1
- संगतकार किन-किन रूपों में मुख्य गायक गायिकाओं की मदद करते हैं? संगतकार मुख्य गायक द्वारा आवाज को लंबी खींचने पर उसकी स्थाई पंक्ति अर्थात गीत की टेक को पकड़े रखता है और गीत को बेसुरा नहीं होने देता। जब मु... 1
- संगतकार जैसे व्यक्ति संगीत के अलावा और किन-किन क्षेत्रों में दिखाई देते हैं? संगतकार जैसे व्यक्ति संगीत के अलावा नाटक, फिल्म, विभिन्न खेलों की टीम, राजनीति आदि में पाए जाते हैं। वैज्ञानिक क्षेत्र में प्रमुख वैज्ञानिक... 1
- संगतकार के माध्यम से कवि किस प्रकार के व्यक्तियों की ओर संकेत करना चाह रहा है? संगतकार के माध्यम से कवि ऐसे लोगों की ओर संकेत करना चाहता है जिनका किसी काम के करने में योगदान तो पूरा होता है किंतु उनका नाम कोई नहीं जानता... 1
- छाया मत छूना' कविता के आधार पर बताइए कि कवि अतीत को क्यों भुलाना चाहता है। छाया मत छूना’ कविता में कवि अतीत को इसलिए भुलाना चाहता है क्योंकि अतीत की सुखद स्मृतियों को यादकर वह अपने वर्तमान को दुखी एवं बोझिल नहीं बना... 1
- छाया मत छूना' कविता की पंक्ति ‘जितना ही दौड़ा तू, उतना ही भरमाया' का क्या आशय है? कविता 'छाया मत छूना' में कवि 'गिरिजा कुमार माथुर' द्वारा रचित ये पंक्ति 'जितना ही दीड़ा तू, उतना जितना ही अधिक धन, दौलत, सुख-ऐश्वर्य व मान-स... 1
- क्या प्रभुता की कामना केवल एक मृगतृष्णा है? इस कथन के पक्ष वा विपक्ष में अपने विचार प्रस्तुत कीजिए। कविता 'छाया मत छूना' में कवि ने प्रभुता की कामना को मृगतृष्णा के समान बताया है जो बिलकुल उचित है। मैं इसके पक्ष में अपने विचार प्रस्तुत कर र... 1
- ‘हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है' पंक्ति में कवि ने जीवन का कौन-सा यथार्थ प्रस्तुत किया 'हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है' पंक्ति के माध्यम से कवि जीवन के उस यथार्थ को बताना चाहता है कि हर सुख में दुख छिपा है क्योंकि चंद्रि... 1
- ‘छाया मत छूना' कविता का कवि कठिन यथार्थ के पूजन को श्रेयस्कर क्यों मानता है? कविता 'छाया मत छूना' में कवि गिरिजा कुमार जी यथार्थ के पूजन को इसलिए श्रेयस्कर मानते हैं। क्योंकि यथार्थ का सामना करके ही व्यक्ति जीवन को सफ... 1
- ‘जीवन में हैं सुरंग सुधियाँ सुहावनी' से 'छाया मत छूना' कविता के कवि का अभिप्राय जीवन की किन मधुर स्मृतियों से है? ‘जीवन में हैं सुरंग सुधियाँ सुहावनी' से 'छाया मत छूना’ कविता के कवि का अभिप्राय जीवन में अपनी प्रिया के साथ व्यतीत किए गए सुखद क्षणों से है।... 1
- 'छाया' से क्या तात्पर्य है? कवि उसे छूने से मना क्यों करता है? कविता 'छाया मत छूना' में 'छाया' से तात्पर्य अतीत के उन सुखों से है जो कवि को कभी प्राप्त नहीं हुए। अप्राप्य के पीछे भागना और उसकी याद में खो... 1
- ‘छाया मत छूना' कविता के आधार पर दुख के कारण बताइए। कवि 'गिरिजा कुमार माथुर' द्वारा रचित कविता ‘छाया मत छूना' में दुख के निम्नलिखित कारण बताए है- (i) व्यक्ति अतीत की यादों में खोया रहता है और... 1
- मृगतृष्णा' से क्या तात्पर्य है? उसके पीछे क्यों नहीं भागना चाहिए? मृगतृष्णा शब्द का अर्थ है कि जिस प्रकार एक मृग रेगिस्तान में रेत पर तेज़ धूप पड़ने पर वहाँ पानी होने के भ्रम में उसके पीछे भागता है, पर वहाँ... 1
- मनुष्य अतीत में खोए रहने के कारण दुखी रहता है। आपके विचार में दुख के और क्या कारण हो सकते हैं? अतीत में खोए रहने के कारण दुखी रहना मानव प्रकृति है जो कि उचित नहीं है। उससे हम अपने वर्तमान व भविष्य को भी नहीं सँवार पाते। मानव के दुखी रह... 1
- ‘क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?'- का क्या भाव है? “क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर पंक्ति का भाव यह है कि जिस प्रकार बसंत ऋतु में फूल न खिले तो वह सुखदायी प्रतीत नहीं होती, वैसे ही मनुष... 2
- ‘मृगतृष्णा' किसे कहते हैं? 'छाया मत छूना' कविता में इसका प्रयोग किस अर्थ में हुआ है? गर्मियों में प्यास से व्याकुल मृग को रेगिस्तान में थोड़ी दूरी पर पानी होने का भ्रम होता है, किंतु पास जाने पर केवल रेत-ही-रेत दिखाई देता है... 1
- कवि ने ‘छाया मत छूना' कविता में कठिन यथार्थ के पूजन की बात क्यों की है? कवि गिरिजा कुमार माथुर ने कविता 'छाया मत छूना' में यथार्थ को पूजने की बात इसलिए कही है। क्योंकि वर्तमान समय में वास्तविकताओं का सामना करके ह... 1
- छाया मत छूना' में कवि 'छाया' किसे कहता है और क्यों? कवि गिरिजा कुमार माथुर 'छाया' विगत समय में बीती हुई स्मृतियों को कहते हैं, जो अनेक बार वर्तमान समय में भी मानव-मस्तिष्क में छाई रहती हैं। ये... 1
- माँ ने बेटी को क्या-क्या सीख दी? माँ ने बेटी को सीख देते हुए कहा कि उसे कभी भी अपनी सुंदरता पर रीझना नहीं चाहिए क्योंकि वह उसकी कमजोरी बन जाएगी। माँ ने उसे यह भी सीख दी कि उ... 1
- माँ को अपनी बेटी अंतिम पूँजी क्यों लग रही थी? माँ को अपनी बेटी सच्ची सहेली की भाँति लगती है क्योंकि वह उसके हर सुख दुख की साथी होती है। माँ बेटी के साथ हर प्रकार की बात कर लेती है। बेटी... 1