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3. (अ) निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए : (4 अंक)रूपा को अपनी स्वार्थपरता और अन्याय इस प्रकार प्रत्यक्ष रूप में कभी न दिख पड़े थे। वह सोचने लगी–‘हाय! कितनी निर्दयी हूँ! जिसकी संपत्ति से मुझे दो सौ रुपया वार्षिक आय हो रही…

3. (अ) निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए : (4 अंक)

रूपा को अपनी स्वार्थपरता और अन्याय इस प्रकार प्रत्यक्ष रूप में कभी न दिख पड़े थे। वह सोचने लगी–‘हाय! कितनी निर्दयी हूँ! जिसकी संपत्ति से मुझे दो सौ रुपया वार्षिक आय हो रही है, उसकी यह दुर्गति! और मेरे कारण! हे दयामय भगवान! मुझसे बड़ी भारी चूक हुई है, मुझे क्षमा करो! आज मेरे बेटे का तिलक था। सैकड़ों मनुष्यों ने भोजन किया। मैं उनके इशारों की दासी बनी रही। अपने नाम के लिए सैकड़ों रुपये व्यय कर दिए परंतु जिसकी बदौलत हजारों रुपये खाए, उसे इस उत्सव में भी भरपेट भोजन न दे सकी। केवल इसी कारण कि, वह वृद्धा असहाय है।’

रूपा ने दीया जलाया, अपने भंडार का द्वार खोला और एक थाली में संपूर्ण सामग्रियाँ सजाकर बूढ़ी काकी की ओर चली।

रूपा ने कंठावरुद्ध स्वर में कहा–‘‘काकी उठो, भोजन कर लो। मुझसे आज बड़ी भूल हुई, उसका बुरा न मानना। परमात्मा से प्रार्थना कर दो कि वह मेरा अपराध क्षमा कर दे।’’

(i) आकृति में लिखिए : (2)
रूपा के कार्य–
[तालिका : (1) ............ जलाना | (2) ............ सजाना | (3) ............ चलना | (4) ............ खोलना]

(ii) ‘असहाय वृद्धों के साथ किए जाने वाले व्यवहार’ विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)

1 answer

Best answer

(i) (1) दीया जलाना (2) थाली सजाना (3) बूढ़ी काकी की ओर चलना (4) भंडार का द्वार खोलना

(ii) असहाय वृद्धों को अपने परिवार का अंग मानकर उनकी सेवा करनी चाहिए। उन्हें अपमान, तिरस्कार या भूखा नहीं रखना चाहिए। उनके अनुभव का आदर करना और समय पर भोजन-दवा देना हमारा कर्तव्य है। रूपा की तरह भूल सुधारकर क्षमा माँगना भी मानवता है।

Doubtly AI · 25 Oct 2026 AI-verified · Oct 2026 Report
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