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3. (अ) निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए : (4 अंक)इस वर्ष बड़ी भीषण गर्मी पड़ रही थी। दिन तो अंगारे से तपे रहते ही थे, रातों में भी लू और उमस से चैन नहीं मिलता था। सोचा इस लिजलिजे और घुटनभरे मौसम से राहत पाने के लिए…

3. (अ) निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए : (4 अंक)

इस वर्ष बड़ी भीषण गर्मी पड़ रही थी। दिन तो अंगारे से तपे रहते ही थे, रातों में भी लू और उमस से चैन नहीं मिलता था। सोचा इस लिजलिजे और घुटनभरे मौसम से राहत पाने के लिए कुछ दिन पहाड़ों पर बिता आएँ।

अगले सप्ताह ही पर्वतीय स्थल की यात्रा पर निकल पड़े। दो-तीन दिनों में ही मन में सुकून-सा महसूस होने लगा था। वहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य, हरे-भरे पहाड़ गर्व से सीना ताने खड़े, दीर्घता सिद्ध करते वृक्ष, पहाड़ों की नीरवता में हल्का-सा शोर कर अपना अस्तित्व सिद्ध करते झरने, मन बदलाव के लिए पर्याप्त थे।

उस दिन शाम के वक्त झील किनारे टहल रहे थे। एक भुट्टेवाला आया और बोला–‘‘साब, भुट्टा लेंगे। गरम-गरम भूनकर मसाला लगाकर दूँगा। सहज ही पूछ लिया–‘‘कितने का है ?’’

‘‘पाँच रुपये का।’’

‘‘क्या? पाँच रुपये में एक भुट्टा। हमारे शहर में तो दो रुपये में एक मिलता है, तुम तीन ले लो।’’

(1) संजाल पूर्ण कीजिए : (2)
[संजाल : केंद्र में ‘लेखक के मन को सुकून देने वाले प्राकृतिक घटक’, चारों ओर चार रिक्त कोष्ठक]

(2) ‘प्रकृति मन को प्रसन्न करती है’ विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)

1 answer

Best answer

(1) हरे-भरे पहाड़, वृक्ष, झरने, झील (नीरवता)

(2) प्रकृति मनुष्य की सच्ची मित्र है। हरे-भरे पहाड़, वृक्ष, झरनों की ध्वनि और शांत झील देखकर मन का तनाव और थकान मिट जाती है। प्रकृति में मन को सुकून मिलता है और जीवन के प्रति नई उमंग जागती है। इसलिए हमें प्रकृति का संरक्षण करना चाहिए।

Doubtly AI · 25 Oct 2026 AI-verified · Oct 2026 Report
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