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3. (अ) निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए : (4 अंक)खेती-बारी के समय, गाँव के किसान सिरचन की गिनती नहीं करते। लोग उसको बेकार ही नहीं, ‘बेगार’ समझते हैं। इसलिए खेत-खलिहान की मजदूरी के लिए कोई नहीं बुलाने जाता है सिरचन क…

3. (अ) निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए : (4 अंक)

खेती-बारी के समय, गाँव के किसान सिरचन की गिनती नहीं करते। लोग उसको बेकार ही नहीं, ‘बेगार’ समझते हैं। इसलिए खेत-खलिहान की मजदूरी के लिए कोई नहीं बुलाने जाता है सिरचन को। क्या होगा, उसको बुलाकर ? दूसरे मजदूर खेत पहुँचकर एक-तिहाई काम कर चुकेंगे, तब कहीं सिरचन राय हाथ में खुरपी डुलाता हुआ दिखाई पड़ेगा; पगडंडी पर तौल-तौलकर पाँव रखता हुआ, धीरे-धीरे। मुफ्त में मजदूरी देनी हो तो और बात है।

आज सिरचन को मुफ्तखोर, कामचोर या चटोर कह ले कोई। एक समय था, जब उसकी मड़ैया के पास बाबू लोगों की सवारियाँ बँधी रहती थीं। उसे लोग पूछते ही नहीं थे, उसकी खुशामद भी करते थे। ‘‘अरे, सिरचन भाई! अब तो तुम्हारे ही हाथ में यह कारीगरी रह गई है सारे इलाके में। एक दिन का समय निकालकर चलो। बड़े भैया की चिट्ठी आई है शहर से—सिरचन से एक जोड़ा चिक बनाकर भेज दो।’’

(1) कृति पूर्ण कीजिए : (2)
(i) लोग सिरचन को कहते हैं – (1) ........ (2) ........
(ii) लोग सिरचन को समझते हैं – (1) ........ (2) ........

(2) ‘कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता’ इस विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)

1 answer

Best answer

(1) (i) (1) मुफ्तखोर (2) कामचोर (अन्य : चटोर)
(ii) (1) बेकार (2) बेगार

(2) हर काम का अपना महत्त्व होता है। किसान, मजदूर, चिक बनाने वाला कारीगर या घर का काम करने वाली स्त्री – सब समाज की गाड़ी के पहिये हैं। काम छोटा-बड़ा नहीं होता, उसे करने वाले का सम्मान बड़ा होता है। जो अपने काम को ईमानदारी से करता है, वही सच्चा श्रमजीवी है।

Doubtly AI · 25 Oct 2026 AI-verified · Oct 2026 Report
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