भ्रष्टाचार का अर्थ है अपने पद, अधिकार या शक्ति का गलत उपयोग करके निजी लाभ उठाना । रिश्वत लेना-देना, काम टालकर पैसे माँगना, योग्य व्यक्ति के स्थान पर सिफारिश वाले को चुनना — ये सब भ्रष्टाचार के रूप हैं । यह एक ऐसा कीड़ा है जो देश को घुन की तरह भीतर-ही-भीतर खोखला कर देता है ।
भ्रष्टाचार के कारण योग्य और ईमानदार लोगों को अवसर नहीं मिलते, गरीबों के अधिकार छिन जाते हैं और विकास की योजनाओं का पैसा जरूरतमंदों तक नहीं पहुँचता । इससे जनता का व्यवस्था पर से विश्वास उठ जाता है । इसलिए यह समाज और देश के माथे पर कलंक है ।
भ्रष्टाचार मिटाने के लिए हर नागरिक को स्वयं ईमानदार रहना चाहिए, न रिश्वत देनी चाहिए न लेनी चाहिए । कामकाज में पारदर्शिता, कड़े कानून और उनका सख्ती से पालन आवश्यक है । ‘सही उत्तर’ लघुकथा का युवक हमें सिखाता है कि सत्य कुछ समय के लिए निराश हो सकता है, परास्त नहीं ।