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2. (आ) निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए : (6 अंक)घन घमंड नभ गरजत घोरा। प्रिया हीन डरपत मन मोरा॥दामिनि दमक रहहिं घन माहीं। खल कै प्रीति जथा थिर नाहीं॥बरषहिं जलद भूमि निअराएँ। जथा नवहिं बुध विद्या पाएँ॥बूँद अघात सहहिं…

2. (आ) निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए : (6 अंक)

घन घमंड नभ गरजत घोरा। प्रिया हीन डरपत मन मोरा॥
दामिनि दमक रहहिं घन माहीं। खल कै प्रीति जथा थिर नाहीं॥
बरषहिं जलद भूमि निअराएँ। जथा नवहिं बुध विद्या पाएँ॥
बूँद अघात सहहिं गिरि कैसे। खल के बचन संत सह जैसे॥
छुद्र नदी भरि चली तोराई। जस थोरेहुँ धन खल इतराई॥
भूमि परत भा ढाबर पानी। जनु जीवहिं माया लपटानी॥
समिटि-समिटि जल भरहिं तलावा। जिमि सदगुन सज्जन पहिं आवा॥
सरिता जल जलनिधि महुँ जाई। होई अचल जिमि जिव हरि पाई॥

(1) उत्तर लिखिए : (2)
(i) गरजने वाले – ........
(ii) चमकने वाली – ........
(iii) बूँद के आघात सहने वाले – ........
(iv) दुष्ट के वचन सहने वाले – ........

(2) पद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए :
(i) निम्न अर्थ के शब्द : (1)
(1) झुकना – ........ (2) मटमैला – ........
(ii) उपसर्गयुक्त शब्द : (1)
(1) ........ (2) ........

(3) उपर्युक्त पद्यांश की अंतिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)

1 answer

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(1) (i) घन (बादल) (ii) दामिनि (बिजली) (iii) गिरि (पर्वत) (iv) संत

(2) (i) (1) झुकना – नवहिं (2) मटमैला – ढाबर
(ii) (1) अचल (अ + चल) (2) सदगुन (सद् + गुन) (अन्य : अघात)

(3) वर्षा से छोटी नदियाँ भरकर किनारे तोड़ती हुई बहने लगीं, जैसे थोड़ा-सा धन पाकर दुष्ट इतराने लगते हैं। धरती पर गिरते ही पानी मटमैला हो गया, मानो जीव को माया ने घेर लिया हो। जल सिमट-सिमटकर तालाबों में भर रहा है, जैसे सद्गुण धीरे-धीरे सज्जन के पास आ जाते हैं। नदियों का जल समुद्र में जाकर वैसे ही स्थिर हो जाता है, जैसे जीव हरि (ईश्वर) को पाकर अचल (शांत) हो जाता है।

Doubtly AI · 24 Oct 2026 AI-verified · Oct 2026 Report
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