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1. (आ) निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए : (8 अंक)तिवारी जी : आपका पहला उपन्यास कौनसा है ?नागर जी : पहला उपन्यास लिखा 1944 में ‘महाकाल’, जो छपा 1946 में। बंगाल से लौटकर इसे लिखा था।तिवारी जी : क्या यही बाद में ‘भूख’…

1. (आ) निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए : (8 अंक)

तिवारी जी : आपका पहला उपन्यास कौनसा है ?

नागर जी : पहला उपन्यास लिखा 1944 में ‘महाकाल’, जो छपा 1946 में। बंगाल से लौटकर इसे लिखा था।

तिवारी जी : क्या यही बाद में ‘भूख’ नाम से प्रकाशित हुआ ?

नागर जी : हाँ।

तिवारी जी : नागर जी, आप अपने समय के और कौन-कौनसे लेखकों के संपर्क-प्रभाव में रहे ?

नागर जी : जगन्नाथदास रत्नाकर, गोपाल राय गहमरी, प्रेमचंद, किशोरी लाल गोस्वामी, लक्ष्मीधर वाजपेयी आदि के नाम याद आते हैं। माधव शुक्ल हमारे यहाँ आते थे। वे आजानुबाहु थे, ढीला कुरता पहनते थे और कुरते की जेब में जलियाँवाला बाग की खून सनी मिट्टी हमेशा रखे रहते थे। 1931 से 37 तक मैं प्रतिवर्ष कोलकाता जाकर शरतचंद्र से मिलता रहा, उनके गाँव भी गया।

तिवारी जी : पुराने साहित्यकारों में आप किसको अपना आदर्श मानते हैं ?

नागर जी : तुलसीदास को तो मुझे घुट्टी में पिलाया गया है। बाबा, शाम को नित्य प्रति ‘रामचरितमानस’ मुझसे पढ़वाकर सुनते थे। श्लोक जबरदस्ती याद करवाते थे।

तिवारी जी : नागर जी, आपने ‘खंजन नयन’ में सूरदास के चमत्कारों का बहुत विस्तार से वर्णन किया है। क्या इनपर आपका विश्वास है ?

(1) संजाल पूर्ण कीजिए : (2)
[केंद्र में ‘‘नागर जी इन लेखकों के संपर्क-प्रभाव में रहे’’ तथा उसके चारों ओर चार रिक्त कोष्ठक]

(2) (i) तालिका पूर्ण कीजिए : (1)
[तालिका — रचनाकार | रचना : (1) अमृतलाल नागर जी – ........ (2) तुलसीदास – ........]
(ii) कृति पूर्ण कीजिए : (1)
[केंद्र में ‘‘माधव शुक्ल की विशेषताएँ’’ तथा नीचे दो रिक्त कोष्ठक]

(3) गद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए :
(i) उपसर्गयुक्त शब्दों के मूल शब्द : (1)
(1) अप्रकाशित – ........ (2) अविश्वास – ........
(ii) प्रत्यययुक्त शब्द : (1)
(1) ........ (2) ........

(4) ‘पुस्तकें ज्ञान प्राप्ति का साधन’ विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)

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(1) जगन्नाथदास रत्नाकर, गोपाल राय गहमरी, प्रेमचंद, किशोरी लाल गोस्वामी (अन्य : लक्ष्मीधर वाजपेयी, माधव शुक्ल, शरतचंद्र)

(2) (i) (1) अमृतलाल नागर जी – ‘महाकाल’ (बाद में ‘भूख’ नाम से प्रकाशित) (2) तुलसीदास – ‘रामचरितमानस’
(ii) आजानुबाहु थे; ढीला कुरता पहनते थे; कुरते की जेब में जलियाँवाला बाग की खून सनी मिट्टी रखते थे।

(3) (i) (1) अप्रकाशित – प्रकाशित (2) अविश्वास – विश्वास
(ii) (1) साहित्यकार (साहित्य + कार) (2) जबरदस्ती (जबरदस्त + ी)

(4) पुस्तकें मनुष्य की सच्ची मित्र हैं। इनसे ज्ञान, अनुभव और नई सोच मिलती है। जो पुस्तकें पढ़ता है, उसका विचार व्यापक और व्यक्तित्व समृद्ध होता है। घर में अच्छी पुस्तकों का संग्रह करना और प्रतिदिन पढ़ना ही ज्ञान प्राप्ति का सच्चा साधन है।

Doubtly AI · 25 Oct 2026 AI-verified · Oct 2026 Report
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