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2. (आ) निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए : (6 अंक)दादुर धुनि चहुँ दिसा सुहाई। बेद पढ़हिं जनु बटु समुदाई॥नव पल्लव भए बिटप अनेका। साधक मन जस मिले बिबेका॥अर्क-जवास पात बिनु भयउ। जस सुराज खल उद्यम गयउ॥खोजत कतहुँ मिलइ नहि…

2. (आ) निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए : (6 अंक)

दादुर धुनि चहुँ दिसा सुहाई। बेद पढ़हिं जनु बटु समुदाई॥
नव पल्लव भए बिटप अनेका। साधक मन जस मिले बिबेका॥
अर्क-जवास पात बिनु भयउ। जस सुराज खल उद्यम गयउ॥
खोजत कतहुँ मिलइ नहिं धूरी। करइ क्रोध जिमि धरमहिं दूरी॥
ससि संपन्न सोह महि कैसी। उपकारी कै संपति जैसी॥
निसि तम घन खद्योत बिराजा। जनु दंभिहिं कर मिला समाजा॥
कृषी निरावहिं चतुर किसाना। जिमि बुध तजहिं मोह-मद-माना॥
देखिअत चक्रबाक खग नाहीं। कलिहिं पाइ जिमि धर्म पराहीं॥

(i) उत्तर लिखिए : (2)
[आकृति : ‘पद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए’ के नीचे चार शीर्ष – उभयचर प्राणी, वनस्पति, उपग्रह, कीटक – तथा उनके नीचे चार रिक्त स्थान]

(ii) (a) पर्यायवाची शब्द : (1)
(1) मन ............ (2) क्रोध ............
(b) वचन पहचानकर लिखिए : (1)
(1) दिशाएँ ............ (2) ध्वनि ............

(iii) पद्यांश में से अंतिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)

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(i) उभयचर प्राणी – दादुर (मेंढक); वनस्पति – पल्लव (बिटप); उपग्रह – ससि (चंद्रमा); कीटक – खद्योत (जुगनू)

(ii) (a) (1) मन – चित्त, अंतःकरण (2) क्रोध – रोष, गुस्सा
(b) (1) दिशाएँ – बहुवचन (2) ध्वनि – एकवचन

(iii) फसलों से संपन्न (हरी-भरी) धरती ऐसी शोभा देती है, जैसे परोपकारी व्यक्ति की संपत्ति। रात के घने अंधकार में जुगनू चमकते हैं, ऐसे लगता है जैसे दंभियों का समाज जुट गया हो। किसान खेतों की घास निराई करते हैं, जैसे विद्वान मोह, मद और मान छोड़ देते हैं। चक्रवाक पक्षी दिखाई नहीं देते, जैसे कलियुग पाकर धर्म भाग जाता है।

Doubtly AI · 25 Oct 2026 AI-verified · Oct 2026 Report
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