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1. (आ) निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए : (8 अंक)अभी समाज में यह चल रहा है कि बहुत से लोग अपनी आजीविका शरीर श्रम से चलाते हैं और थोड़े बौद्धिक श्रम से। जिनके पास संपत्ति अधिक है, वे आराम में रहते हैं। अनेक लोगों में…

1. (आ) निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए : (8 अंक)

अभी समाज में यह चल रहा है कि बहुत से लोग अपनी आजीविका शरीर श्रम से चलाते हैं और थोड़े बौद्धिक श्रम से। जिनके पास संपत्ति अधिक है, वे आराम में रहते हैं। अनेक लोगों में श्रम करने की आदत भी नहीं है। इस दशा में उक्त नियम का अमल होना दूर की बात है फिर भी उसके पीछे जो तथ्य है, वह हमें स्वीकार करना चाहिए भले ही हमारी दुर्बलता के कारण हम उसे ठीक तरह से न निभा सकें क्योंकि आजीविका की साधन-सामग्री किसी-न-किसी के श्रम बिना हो ही नहीं सकती। इसलिए बिना शरीर श्रम किए उस सामग्री का उपयोग करने का न्यायोचित अधिकार हमें नहीं मिलता। अगर पैसे के बल पर हम सामग्री खरीदते हैं तो उस पैसे की जड़ भी अंत में श्रम ही है।

धनिक लोग अपनी ज्यादा संपत्ति का उपयोग समाज के हित में ट्रस्टी के तौर पर करें। संपत्ति दान यज्ञ और भूदान यज्ञ का भी आखिर आशय क्या है ? अपने पास आवश्यकता से जो कुछ अधिक है, उसपर हम अपना अधिकार न समझकर उसका उपयोग दूसरों के लिए करें।

यह भी बहस चलती है कि धनिकों के दान से सामाजिक उपयोग के अनेक बड़े-बड़े कार्य होते हैं जैसे कि अस्पताल, विद्यालय आदि।

(1) उत्तर लिखिए : (2)
(i) समाज में अपनी आजीविका बहुत से लोग इससे चलाते हैं—
(ii) समाज में अपनी आजीविका थोड़े लोग इससे चलाते हैं—
(iii) आराम में रहने वाले लोगों के पास यह अधिक है—
(iv) अनेक लोगों में इसकी आदत नहीं है—

(2) कृति पूर्ण कीजिए : (2)
(i) [केंद्र में ‘गद्यांश में उल्लेखित यज्ञ’ और नीचे दो रिक्त कोष्ठक]
(ii) [केंद्र में ‘धनिकों के दान से होने वाले सामाजिक कार्य’ और नीचे दो रिक्त कोष्ठक]

(3) (i) सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए : (1)
[तालिका : उपसर्गयुक्त शब्द | ← श्रम → | प्रत्यययुक्त शब्द]
(ii) गद्यांश में प्रयुक्त शब्दयुग्म ढूँढ़कर उसका अर्थपूर्ण वाक्य में प्रयोग कीजिए। (1)

(4) ‘करोगे दान पाओगे समाधान’ विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)

1 answer

Best answer

(1) (i) शरीर श्रम (ii) बौद्धिक श्रम (iii) संपत्ति (iv) श्रम करने की

(2) (i) संपत्ति दान यज्ञ, भूदान यज्ञ
(ii) अस्पताल, विद्यालय

(3) (i) उपसर्गयुक्त शब्द – परिश्रम (परि + श्रम) (अन्य : विश्राम – वि + श्राम); प्रत्यययुक्त शब्द – श्रमिक (श्रम + इक) (अन्य : श्रमी)
(ii) बड़े-बड़े — मेले में बड़े-बड़े खिलौने बिक रहे थे।

(4) दान से दिया हुआ धन नष्ट नहीं होता, बल्कि समाज के कल्याण में लगकर अनेक गुना हो जाता है। धनिक अपनी अधिक संपत्ति समाजहित में लगाएँ तो अस्पताल, विद्यालय और अन्य सुविधाएँ बनती हैं। देने से मन को शांति और समाज को सच्चा समाधान मिलता है।

Doubtly AI · 25 Oct 2026 AI-verified · Oct 2026 Report
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