Skip to content
doubtly

Apni Gandh Nahi Bechunga Summary Notes Class 10 SSC Hindi

Doubtly 1 min read Updated 25 Oct 2026 Save WhatsApp
On this page

यह पाठ एक प्रेरणादायी गीत है जिसके रचनाकार बालकवि बैरागी हैं। इस पद्य के माध्यम से कवि ने फूल के स्वाभाव और उसके स्वाभिमान का सुंदर वर्णन करते हुए मनुष्य को भी आत्मसम्मान के साथ जीने का संदेश दिया है.

रचनाकार परिचय

बालकवि बैरागी का जन्म सन १९३१ में मंदसौर (मध्य प्रदेश) में हुआ और मृत्यु सन २०१८ में हुई। आपने जीवन के संघर्षों से प्रेरणा लेकर कविता के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त की और साहित्य के साथ राजनीति में भी सक्रिय रहे.

सारांश

प्रस्तुत गीत 'अपनी गंध नहीं बेचूँगा' के माध्यम से गीतकार बालकवि बैरागी ने फूल के चरित्र के माध्यम से स्वाभिमान का पाठ पढ़ाया है। चाहे उपवन में फूल बिक जाएँ या कितने ही फागुन बीत जाएँ, फूल अपनी खुशबू यानी अपना स्वाभिमान कभी नहीं बेचेगा।

फूल का मानना है कि जिस डाली ने उसे पाला और जिन काँटों ने उसकी रक्षा की, उसी प्रकृति का उस पर पहला अधिकार है। वह अपने संस्कारों और वचन से पीछे नहीं हटेगा चाहे उसे कोई कितना भी मोल लगाने की कोशिश क्यों न करे।

फूल को मौसम के आने-जाने या सुख-दुःख से कोई फर्क नहीं पड़ता। वह अपने आत्मबल और खुद के साथ किए गए अनुबंध पर अडिग रहता है।

अंत में फूल को यह भी ज्ञात है कि वह एक दिन झर जाएगा, लेकिन उससे पहले वह पवन के साथ हर घर तक अपनी खुशबू पहुँचाकर दुनिया को खुद्दारी का पाठ पढ़ाएगा। बिकने से बेहतर उसे अपनी माटी में मरना मंजूर है।

माइंड मैप

अपनी गंध नहीं बेचूँगा

  • फूल का संकल्प
    • अपनी गंध नहीं बेचेगा
    • सौगंध और अनुबंध की रक्षा
  • प्रकृति से जुड़ाव
    • डाली और कोंपल का उपकार
    • काँटों द्वारा रक्षा
  • मौसम की परवाह नहीं
    • आना-जाना प्रकृति का नियम
    • सुख-दुःख का प्रभाव नहीं
  • अंतिम संदेश
    • माटी में झरना स्वीकार
    • खुद्दारी का परिचय देना

पद्य के विकास का क्रम

  1. फूल का किसी भी मूल्य पर अपनी गंध न बेचने का दृढ़ संकल्प
  2. प्रकृति के घटकों (डाली, काँटों, मालिन) के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना
  3. मौसम के उतार-चढ़ाव और मोल लगाने वालों की उपेक्षा करना
  4. अपने संस्कारों और स्वयं से किए गए अनुबंध पर अटल रहना
  5. अंततः अपनी माटी में झर जाने की बात स्वीकार करना और खुद्दारी का संदेश देना

विषय और संदेश

स्वाभिमान और खुद्दारी

फूल किसी भी परिस्थिति में अपने आत्मसम्मान और अपनी सुगंध को नहीं बेचता, जो मनुष्य के लिए भी एक बड़ा संदेश है।

प्रकृति के प्रति कृतज्ञता

फूल उन काँटों और डालियों को कभी नहीं भूलता जिन्होंने उसकी रक्षा की और उसे पाला-पोसा।

याद रखने योग्य मुख्य बिंदु

  • गीतकार बालकवि बैरागी की रचना ओजगुण से परिपूर्ण है।
  • फूल प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अपने उसूलों से समझौता नहीं करता।
  • बिकने की लाचारी से बेहतर अपनी माटी में प्राण त्यागना है।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
गंधमहक, बास (fragrance)
कोंपलनई कोमल पत्तियाँ (tender leaf)
अरुणाईलालिमा, लाली (reddish glow)
अनुबंधसमझौता, प्रतिज्ञा पत्र (agreement)
प्रतिबंधरुकावट, विघ्न (restriction/ban)
खुद्दारीस्वाभिमान (self-respect)
सुमनफूल (flower)
उपवनबाग, बगीचा (garden)

अलंकार और काव्य सौंदर्य

अलंकार/विशेषताउदाहरणस्पष्टीकरण
प्रतीक योजनाअपनी गंध नहीं बेचूँगायहाँ 'गंध' मनुष्य के आंतरिक स्वाभिमान और चरित्र का प्रतीक है।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

Q1. फूल को बिक जाने से भी बेहतर क्या लगता है?

फूल को बिक जाने से बेहतर यह लगता है कि वह अपनी माटी में ही झर जाए।

Q2. फूल के अनुसार उसे तोड़ने का पहला अधिकार किसे है?

फूल के अनुसार उसे तोड़ने का पहला अधिकार उन डालियों, कोंपलों और काँटों को है जिन्होंने उसे पाला और उसकी रक्षा की है।

Q3. फूल अपनी सौगंध क्यों नहीं बेचेगा?

क्योंकि वही सौगंध उसका संस्कार बन गई है और वह किसी भी मूल पर अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं करना चाहता।

Q4. फूल को मौसम से कुछ लेना-देना क्यों नहीं है?

फूल का मानना है कि मौसम का आना-जाना प्राकृतिक है और जीवन के सुख-दुःख या उतार-चढ़ाव उसके आंतरिक स्वभाव को प्रभावित नहीं कर सकते।

Q5. दाता होगा तो दे देगा, खाता होगा तो खाएगा - इस पंक्ति से स्पष्ट होने वाला अर्थ लिखिए।

इस पंक्ति का आशय यह है कि प्रकृति और ईश्वर पर भरोसा रखना चाहिए। जो देने वाला है वह देगा और जो भाग्य में है वह मिलेगा, इसलिए भविष्य की चिंता में अपने उसूलों को नहीं छोड़ना चाहिए।

Q6. अंत का पता होने पर भी फूल की क्या अभिलाषा है?

अंत का पता होने पर भी फूल की यह अभिलाषा है कि मरने से पहले वह पवन के साथ हर एक के घर जाकर अपनी खुशबू बिखेरे और दुनिया को खुद्दारी का पाठ पढ़ाए।

Q7. रचनाकार का नाम और रचना का प्रकार लिखिए।

रचनाकार का नाम बालकवि बैरागी है और रचना का प्रकार गीत है।

Q8. इस पद्य से क्या संदेश मिलता है?

इस पद्य से यह संदेश मिलता है कि मनुष्य को कितनी भी बड़ी कठिनाई या प्रलोभन क्यों न मिले, उसे अपने स्वाभिमान, संस्कारों और खुद्दारी को कभी नहीं बेचना चाहिए।

परीक्षा टिप्स

  • कवि का नाम और उनका जन्म-मृत्यु वर्ष याद रखें।
  • शब्दार्थ (विशेषकर 'कोंपल', 'अरुणाई', 'अनुबंध') को अच्छे से तैयार करें।
  • पद्य विश्लेषण के बिंदुओं (रचनाकार, प्रकार, संदेश) की तैयारी पक्की रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस पाठ के कवि कौन हैं?

इस पाठ के कवि बालकवि बैरागी हैं।

कविता में 'गंध' शब्द किसका प्रतीक है?

कविता में 'गंध' मनुष्य के स्वाभिमान, चरित्र और आत्मसम्मान का प्रतीक है।

बालकवि बैरागी की प्रमुख कृतियाँ कौन सी हैं?

उनकी प्रमुख कृतियों में 'गौरव-गीत' और 'दरद दीवानी' (काव्यसंग्रह) शामिल हैं।

ये नोट्स बालभारती हिंदी लोकभारती पाठ्यपुस्तक (2026-27) से AI की सहायता से तैयार किए गए हैं और पाठ्यपुस्तक से जाँचे गए हैं।

More in Hindi (Lokbharati)

See all →