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Budhi Kaki Notes, Summary, Q&A | Class 10 Hindi SSC

Doubtly 1 min read Updated 25 Oct 2026 Save WhatsApp
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यह पूरक पठन प्रसिद्ध कहानीकार प्रेमचंद द्वारा रचित एक अत्यंत संवेदनशील कहानी है। इस पाठ के माध्यम से समाज में वृद्धों के प्रति तिरस्कार की भावना और वादाखिलाफी पर जोरदार प्रहार किया गया है तथा उनके प्रति आदरभाव रखने की प्रेरणा दी गई है।

रचनाकार परिचय

प्रेमचंद का मूल नाम धनपत राय था। उनका जन्म सन् 1880 में लमही (उ.प्र.) में हुआ तथा मृत्यु सन् 1936 में वाराणसी (उ.प्र.) में हुई। वे आधुनिक हिंदी गद्य साहित्य के कहानी पितामह माने जाते हैं, जिनकी रचनाओं में शोषितों, किसानों और स्त्रियों की समस्याओं का विस्तृत चित्रण मिलता है।

सारांश

बूढ़ी काकी के पति का स्वर्गवास बहुत पहले हो चुका था और उनके अपने बेटे भी जवानी में ही चल बसे थे, जिसके बाद उन्होंने अपनी सारी संपत्ति अपने भतीजे पंडित बुद्धिराम के नाम लिख दी थी।

बुद्धिराम के बड़े बेटे मुखराम के तिलक के उत्सव के दौरान घर में तरह-तरह के स्वादिष्ट पकवान बन रहे थे। उनकी खुशबू से बेचैन होकर भूखी बूढ़ी काकी कड़ाह के पास जा बैठती हैं, जिससे क्रुद्ध होकर रूपा उन्हें झिड़क कर कोठरी में वापस भेज देती है।

रात को जब मेहमान खा चुके होते हैं और काकी को कोई बुलाने नहीं आता, तो वे खुद मेहमानों के बीच पहुँच जाती हैं। इससे क्रोधित होकर बुद्धिराम उन्हें घसीटकर अँधेरी कोठरी में पटक देते हैं, और किसी को भी उनपर दया नहीं आती सिवाय छोटी बच्ची लाड़ली के।

लाड़ली अपने हिस्से की पूड़ियाँ अपनी गुड़ियों की पिटारी में बचाकर रखती है और रात को चुपके से ले जाकर बूढ़ी काकी को खिलाती है। इससे काकी की लालसा और बढ़ जाती है और वे जूठे पत्तलों से पूड़ी के टुकड़े खाने लगती हैं, जिसे देखकर रूपा का हृदय सन्न रह जाता है।

अपनी गलती और स्वार्थपरता का अहसास होने पर रूपा पश्चात्ताप से भर जाती है। वह एक थाली में भरपेट भोजन सजाकर बूढ़ी काकी के पास जाती है, जिसे पाकर काकी सब कुछ भूलकर प्रसन्नता से भोजन करती हैं और उनके हृदय से सच्ची Sadihchhaayen निकलती हैं।

माइंड मैप

बूढ़ी काकी

  • संपत्ति और उपेक्षा
    • भतीजे बुद्धिराम के नाम संपत्ति लिखना
    • वादे के बावजूद भरपेट भोजन न मिलना
    • बच्चों द्वारा सताया जाना
  • उत्सव का वातावरण
    • मुखराम का तिलक उत्सव
    • पकवानों की खुशबू से बेचैनी
    • कड़ाह के पास जाना और रूपा का क्रोध
  • अपमान और लाड़ली का स्नेह
    • बुद्धिराम द्वारा कोठरी में पटका जाना
    • लाड़ली द्वारा अपने हिस्से की पूड़ियाँ देना
    • जूठे पत्तलों से पूड़ी खाना
  • रूपा का पश्चात्ताप
    • गलती का अहसास और करुणा
    • भंडार से भोजन की थाली लाना
    • काकी की क्षमा और आशीर्वाद

घटनाओं का क्रम

  1. बूढ़ी काकी द्वारा भतीजे के नाम संपत्ति लिखना और बदले में उपेक्षा सहना
  2. मुखराम के तिलक के अवसर पर घर में स्वादिष्ट पकवान बनना
  3. सुगंध से आकृष्ट होकर बूढ़ी काकी का कड़ाह के पास पहुँचना और रूपा का डाँटना
  4. मेहमानों के बीच पहुँचने पर बुद्धिराम द्वारा काकी को अँधेरी कोठरी में पटकना
  5. लाड़ली द्वारा अपनी पिटारी से बचाई गई पूड़ियाँ काकी को खिलाना
  6. इच्छा के वशीभूत होकर काकी का जूठे पत्तलों से पूड़ियाँ खाना
  7. रूपा का दृश्य देखकर द्रवित होना और अपनी भूल का पश्चात्ताप करना
  8. रूपा द्वारा आदरपूर्वक भोजन की थाली लाना और काकी का तृप्त होना

पात्र परिचय

पात्रविशेषताएँ
बूढ़ी काकीअसहज, स्वादलोचनीय, असहाय, वृद्ध, और भोजन के प्रति अत्यधिक लालसा रखने वाली।
रूपाबुद्धिराम की पत्नी, स्वभाव से तीव्र किंतु ईश्वर से डरने वाली और अंततः पश्चात्ताप करने वाली।
बुद्धिरामस्वभाव के सज्जन किंतु अपने कोष पर आंच न आने देने वाले और काकी पर अत्याचार करने वाले।
लाड़लीबुद्धिराम की छोटी बेटी, भोली, दयालु और काकी से अगाध प्रेम करने वाली।

विषय और संदेश

वृद्धों की उपेक्षा और संवेदनहीनता

कहानी समाज में बुजुर्गों के प्रति बढ़ती उदासीनता और स्वार्थी व्यवहार को उजागर करती है जहाँ लोग संपत्ति हड़पकर उन्हें भूल जाते हैं।

पश्चात्ताप और मानवीय करुणा

पात्रों के हृदय परिवर्तन के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि अपनी गलती का अहसास होने पर क्षमा माँगने और प्रेम देने से रिश्तों में सुधार आ सकता है।

याद रखने योग्य मुख्य बिंदु

  • लेखक प्रेमचंद ने बुजुर्गों के मनोवैज्ञानिक विश्लेषण को बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया है।
  • बूढ़ी काकी की समस्त इंद्रियाँ जवाब दे चुकी थीं और उनकी केवल जिह्वा का स्वाद ही शेष था।
  • लाड़ली का चरित्र परिवार में एकमात्र स्नेह का प्रतीक है जो काकी की पीड़ा समझती है।
  • अंतिम क्षणों में रूपा का प्रायश्चित समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
जिह्वाजीभ (tongue)
चेष्टाप्रयास या इच्छा (effort/desire)
सब्जबाग दिखानाझूठे और लुभावने वादे करना (false promises)
अनुरागप्रेम या प्रीति (affection)
क्षुधाभूख (hunger)
तृष्णालालसा या प्यास (desire/greed)
सिसकनासिसकी भरकर रोना (sobbing)
कुलीमुँह साफ करने के लिए पानी फेंकने की क्रिया (rinsing mouth)
भगोड़ाभाग हुआ व्यक्ति (runaway)

अलंकार और काव्य सौंदर्य

अलंकार/विशेषताउदाहरणस्पष्टीकरण
उपमाकोठरी में शोकमय विचार की भाँति बैठी हुईकाकी की उदास स्थिति की तुलना शोकमय विचार से की गई है।
रूपकसंतोष सेतु जब टूट जाता हैसंतोष को सेतु (पुल) के रूप में दर्शाया गया है।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

Q1. बूढ़ी काकी ने अपनी सारी संपत्ति किसके नाम लिख दी थी?

बूढ़ी काकी ने अपने भतीजे पंडित बुद्धिराम के नाम अपनी सारी संपत्ति लिख दी थी।

Q2. संपत्ति की आय कितनी थी, फिर भी काकी की स्थिति क्यों दयनीय थी?

संपत्ति की वार्षिक आय डेढ़-दो सौ रुपये से कम न थी, किंतु भतीजे बुद्धिराम और उनकी पत्नी रूपा की उपेक्षा के कारण काकी को कठिनाई से ही पेट भर भोजन मिलता था।

Q3. पूरे परिवार में बूढ़ी काकी से सबसे अधिक स्नेह कौन करता था?

पूरे परिवार में बूढ़ी काकी से सबसे अधिक स्नेह बुद्धिराम की छोटी लड़की लाड़ली करती थी।

Q4. लाड़ली ने बूढ़ी काकी के लिए क्या किया?

लाड़ली ने अपने हिस्से की पूड़ियाँ अपनी गुड़ियों की पिटारी में बचाकर रखी थीं और रात को चुपके से जाकर बूढ़ी काकी को खिला दीं।

Q5. कारण लिखिए: बूढ़ी काकी ने भतीजे के नाम सारी संपत्ति लिख दी।

बूढ़ी काकी के पति का स्वर्गवास हो चुका था और उनके अपने बेटे तरुण अवस्था में ही चल बसे थे। परिवार में भतीजे के सिवाय और कोई नहीं बचा था, इसलिए उन्होंने अपनी संपत्ति उसके नाम लिख दी।

Q6. कारण लिखिए: लाड़ली ने पूड़ियाँ छिपाकर रखीं।

लाड़ली अपने माता-पिता द्वारा काकी के प्रति किए जाने वाले दुर्व्यवहार से झुलझला रही थी और वह अपने हिस्से की पूड़ियाँ काकी को प्रेमपूर्वक खिलाना चाहती थी।

Q7. बुद्धिराम का काकी के प्रति दुर्व्यवहार दर्शाने वाली कोई चार बातें लिखिए।

1. संपत्ति लिखवाने के बाद भी भरपेट भोजन न देना। 2. मेहमानों के सामने आने पर काकी को क्रोधित होकर अँधेरी कोठरी में पटक देना। 3. उनकी वृद्धावस्था और दीनता पर करुणा न करना। 4. घर के उत्सव में उन्हें उपेक्षित रखना।

Q8. पाठ के आधार पर रूपा के चरित्र की विशेषताएँ संक्षेप में लिखिए।

रूपा स्वभाव से तीव्र थी सही, परंतु ईश्वर से डरती थी। उत्सव की व्यस्तता में वह काकी पर झपटी थी, किंतु अंत में अपनी स्वार्थपरता और अन्याय का अहसास होने पर उसने पश्चात्ताप किया और काकी से क्षमा माँगकर भरपेट भोजन कराया।

परीक्षा टिप्स

  • पाठ के लेखक 'प्रेमचंद' का नाम और उनका परिचय (जन्म-मृत्यु) अच्छी तरह याद रखें, क्योंकि इसपर बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
  • कहानी के कठिन शब्दार्थ और मुहावरों (जैसे 'गला फाड़ना', 'कलेजे में हूक उठना') के अर्थ परीक्षा में पूछे जाते हैं, अतः उनका अभ्यास करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बूढ़ी काकी पाठ के लेखक कौन हैं?

इस पाठ के लेखक प्रसिद्ध कहानीकार प्रेमचंद हैं।

बूढ़ी काकी की मुख्य कमजोरी क्या थी?

बुढ़ापे में बूढ़ी काकी की समस्त इंद्रियाँ काम करना बंद कर चुकी थीं और केवल जिह्वा का स्वाद ही उनकी एकमात्र चेष्टा शेष रह गई थी।

कहानी का मुख्य संदेश क्या है?

कहानी का मुख्य संदेश यह है कि हमें वृद्धों के प्रति आदरभाव रखना चाहिए और उनके साथ प्रेमपूर्ण व्यवहार करना चाहिए।

ये नोट्स बालभारती हिंदी लोकभारती पाठ्यपुस्तक (2026-27) से AI की सहायता से तैयार किए गए हैं और पाठ्यपुस्तक से जाँचे गए हैं।

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