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Chapter 15 Chapa Notes, Summary, Questions - Class 10 SSC Hindi

Doubtly 1 min read Updated 25 Oct 2026 Save WhatsApp
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यह पाठ हिंदी लोकभारती पाठ्यपुस्तक की कविता 'छापा' है, जिसके रचनाकार ओमप्रकाश 'आदित्य' जी हैं। यह एक हास्य-व्यंग्य कविता है जिसमें छापामारों और एक गरीब कवि के बीच हुए संवाद के माध्यम से समाज की वास्तविक आर्थिक स्थिति को दर्शाया गया है।

रचनाकार परिचय

ओमप्रकाश 'आदित्य' जी का जन्म १९३६ में और मृत्यु २००९ में हुई थी।

सारांश

कविता की शुरुआत में आयकर विभाग के अधिकारी कवि के घर छापा मारने आते हैं और आते ही पूछते हैं कि सोना कहाँ है। इस पर कवि जवाब देता है कि सोना उसकी आँखों में है क्योंकि वह कई रातों से सोया नहीं है। अधिकारी जब स्वर्ण माँगते हैं, तो कवि कहता है कि स्वर्ण तो उसने अपनी कविताओं में बिखेरे हैं।

जब अधिकारी अनधिकृत रूप से अर्जित 'अर्थ' (धन) और 'चाँदी' माँगते हैं, तो कवि व्यंग्य करते हुए कहता है कि अर्थ उसकी नई कविताओं में है और चाँदी उसके बालों में धीरे-धीरे आ रही है। अधिकारी जब नोट और मुद्रा के बारे में पूछते हैं, तो कवि कहता है कि मुद्राएँ उसके मुख पर देख लीजिए और नोट परीक्षा से एक महीने पहले तैयार करूँगा।

निराश होकर अधिकारी शयनकक्ष में घुस जाते हैं और फटे हुए तकिये की रूई नोचने लगते हैं, टूटी अलमारी खोलते हैं, रसोई की खाली पीपियों और बच्चों की गुल्लक तक को टटोल डालते हैं। उन्हें कनस्तरों और मटकों में केवल शून्य-ब्रह्मांड मिलता है।

घर की ऐसी दयनीय और अभावग्रस्त स्थिति को देखकर छापामारों का खिला हुआ चेहरा मुरझा जाता है और उनके हृदय में रौद्र रस की जगह करुण रस समा जाता है। वे अपनी असफलता पर पछताते हुए सिर झुकाकर जाने लगते हैं।

कवि उन्हें रोककर एक अंतिम सुझाव देता है कि जिनके घरों में सोने-चाँदी के पलंग और सोफे हैं, उन्हें आप निकलवा लीजिए, पर जिनके घर में बैठने को कुछ भी नहीं उनके यहाँ कम-से-कम एक तखत तो डलवा दीजिए।

माइंड मैप

छापा

  • छापामारों के प्रश्न
    • सोना कहाँ है?
    • अर्थ और चाँदी
    • नोट और मुद्रा
  • कवि के उत्तर
    • आँखों में नींद
    • कविता में सुवर्ण
    • बालों में चाँदी
  • घर की स्थिति
    • फटा तकिया
    • खाली पीपियाँ
    • शून्य-ब्रह्मांड
  • अधिकारियों की प्रतिक्रिया
    • चेहरा मुरझाना
    • करुण रस समाना
    • पछतावा

कविता के विकास के चरण

  1. छापामारों का कवि के घर प्रवेश करना
  2. सोना, चाँदी और धन के विषय में पूछताछ
  3. कवि द्वारा हर प्रश्न का हास्य-व्यंग्यात्मक उत्तर देना
  4. छापामारों द्वारा घर के कोने-कोने की तलाशी लेना
  5. सब कुछ खाली मिलने पर छापामारों के मन में करुणा जागना
  6. कवि द्वारा अधिकारियों को एक नया और अनोखा सुझाव देना

विषय और संदेश

आम आदमी की आर्थिक स्थिति

कवि ने एक आम और गरीब व्यक्ति के जीवन के संघर्ष और उसके घर की आर्थिक तंगी को हास्य के माध्यम से बहुत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है।

हास्य और व्यंग्य

आयकर विभाग के गंभीर छापे को कवि ने अपनी हास्यपूर्ण शैली और शब्दों के श्लेष अर्थों के जरिए एक मनोरंजक व्यंग्य में बदल दिया है।

याद रखने योग्य मुख्य बिंदु

  • यह एक हास्य-व्यंग्य कविता है जिसके रचनाकार ओमप्रकाश 'आदित्य' हैं।
  • छापामार जब घर में सोना, चाँदी और धन ढूँढते हैं, तो कवि उन्हें अपनी कविता, बाल और मुख देखने की बात कहता है।
  • घर की दयनीय स्थिति देखकर कठोर दिखने वाले छापामारों के मन में भी करुणा उत्पन्न हो जाती है।
  • कविता के अंत में कवि गरीबों के घरों में तखत डलवाने का सामाजिक व्यंग्यात्मक सुझाव देता है।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
रोषगुस्सा (anger)
अर्जितकमाया हुआ (earned)
अर्थपैसा या धन (money/wealth)
कनस्तरटीन का पीपा (tin canister)
तखतलकड़ी की बड़ी चौकी (wooden bench/platform)
अरण्यकांडघर की उजाड़ और दयनीय स्थिति (desolate state)
उद्भ्रांतविभ्रमित या चकराया हुआ (confused)
लरजकरकाँपकर (trembling)

अलंकार और काव्य सौंदर्य

अलंकार/विशेषताउदाहरणस्पष्टीकरण
श्लेष अलंकार / शब्द क्रीड़ासोना कहाँ है? मेरी आँखों में हैएक ही शब्द के अलग-अलग संदर्भों में भिन्न अर्थ निकालना, जैसे 'सोना' का नींद और धातु दोनों अर्थों में प्रयोग।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

Q1. कवि ने 'सोना' शब्द का क्या अर्थ निकाला?

छापामारों ने जब 'सोना' कीमती धातु के रूप में पूछा, तब कवि ने हास्य उत्पन्न करते हुए उत्तर दिया कि सोना उसकी आँखों में है क्योंकि वह कई रातों से सोया नहीं है।

Q2. छापामारों को घर की तलाशी लेने पर क्या मिला?

छापामारों को शयनकक्ष में फटे तकिये की रूई, टूटी अलमारी, रसोई की खाली पीपियाँ, बच्चों की गुल्लक, कनस्तर और मटके टटोलने पर हर जगह केवल खालीपन यानी शून्य-ब्रह्मांड मिला।

Q3. घर की स्थिति देखकर छापामारों के व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?

घर की अत्यंत दयनीय और अभावग्रस्त स्थिति को देखकर छापामारों का खिला हुआ चेहरा मुरझा गया। उनके क्रूर और कठोर हृदय में रौद्र रस की जगह करुण रस समा गया और वे अपनी असफलता पर पछताने लगे।

Q4. कवि ने छापामारों को अंत में क्या सुझाव दिया?

कवि ने छापामारों से कहा कि यदि उनके घर में अधिक धन होता तो वे ले जाते, लेकिन अब जब बिलकुल धन नहीं है, तो वे उन्हें कुछ देकर जाएँ। जिनके घरों में सोने-चाँदी के पलंग हैं वहाँ से निकलवा लीजिए, पर जिनके यहाँ बैठने को कुछ नहीं है वहाँ कम-से-कम एक तखत डलवा दीजिए।

Q5. शब्दों के विभिन्न अर्थों के आधार पर मिलान कीजिए: अर्थ, सुवर्ण, चाँदी, मुद्रा।

कविता के आधार पर इनके अर्थ इस प्रकार हैं: 'अर्थ' नई कविताओं में है, 'सुवर्ण' काव्य कृतियों में बिखरा है, 'चाँदी' बालों में आ रही है, और 'मुद्राएँ' मुख पर देखी जा सकती हैं।

Q6. कविता के आधार पर उन वस्तुओं के नाम लिखिए जो खाली थीं।

कविता के अनुसार रसोई की पीपियाँ, बच्चों की गुल्लक, कनस्तर और मटके पूरी तरह खाली थे।

Q7. अंतिम चार पंक्तियों का भावार्थ अपने शब्दों में लिखिए।

अंतिम पंक्तियों में कवि व्यंग्य करते हुए कहता है कि छापे मारने वाले अमीरों के यहाँ से तो धन जप्त करते हैं, लेकिन जो लोग अत्यधिक गरीब हैं और जिनके पास बुनियादी जरूरत की चीजें भी नहीं हैं, सरकार या प्रशासन को उनकी मदद करनी चाहिए और उनके घरों में कम-से-कम बैठने के लिए एक तखत की व्यवस्था तो करनी ही चाहिए।

Q8. 'कर जमा करना, देश के विकास को गति देना है' इस विषय पर अपने विचार लिखिए।

करों (Taxes) से मिलने वाले राजस्व का उपयोग सरकार देश की बुनियादी संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, और सुरक्षा जैसी जनहित योजनाओं के विकास के लिए करती है। इसलिए ईमानदारी से कर चुकाना हर नागरिक का कर्तव्य है जिससे देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता है।

परीक्षा टिप्स

  • कविता में आए शब्दों (जैसे सोना, अर्थ, चाँदी, मुद्रा) के श्लेष प्रयोग को अच्छे से समझ लें क्योंकि परीक्षा में इन शब्दों के अलग-अलग अर्थ पूछे जा सकते हैं.
  • हास्य-व्यंग्य शैली और कवि के उत्तरों की व्यंग्यात्मक प्रकृति को ध्यान में रखें.
  • पाठ के 'शब्द संसार' के कठिन शब्दों के अर्थ अच्छी तरह याद कर लें.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छापा कविता के कवि कौन हैं?

छापा कविता के रचयिता प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कवि ओमप्रकाश 'आदित्य' जी हैं।

इस कविता की मुख्य विधा क्या है?

यह एक हास्य-व्यंग्य कविता है।

छापामारों के मन में अंत में कौन सा रस समा गया?

छापामारों के मन में रौद्र रस की जगह 'करुण रस' समा गया।

ये नोट्स बालभारती हिंदी लोकभारती पाठ्यपुस्तक (2026-27) से AI की सहायता से तैयार किए गए हैं और पाठ्यपुस्तक से जाँचे गए हैं।

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