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Do Laghukathayen Notes, Summary, Questions - Class 10 SSC Hindi

Doubtly 1 min read Updated 25 Oct 2026 Save WhatsApp
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यह पाठ नरेंद्रकौर छाबड़ा जी द्वारा रचित दो लघुकथाओं (पूरक पठन) का संग्रह है। प्रथम लघुकथा में मॉल और रेहड़ीवालों के प्रति हमारे दोहरे रवैये पर चोट की गई है, जबकि दूसरी लघुकथा में समाज में फैले भ्रष्टाचार और सत्य की जीत को दर्शाया गया है।

रचनाकार परिचय

नरेंद्रकौर छाबड़ा जी जानी-मानी कथाकार हैं। कहानियों के साथ-साथ आपने बहुत-सी लघुकथाएँ भी लिखी हैं। आपकी लघुकथाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से स्थान पाती रही हैं। आपकी प्रमुख कृति 'मेरी चुनिंदा लघुकथाएँ' है।

सारांश

प्रथम लघुकथा 'कंगाल' में लेखिका ने भीषण गरमी से राहत पाने के लिए पहाड़ों की यात्रा का वर्णन किया है। झील किनारे टहलते समय एक भुट्टेवाले से पाँच रुपये में भुट्टा मिलने पर लेखिका और उनके साथी ने मोल-भाव किया और उसे कम दाम देने को कहा।

आगे बढ़ने पर लेखिका के मन में विचार आया कि हम लोग पहाड़ों पर घूमने के लिए हजारों रुपये खर्च करते हैं, बड़े होटलों और दुकानों में बिना दाम पूछे पैसे देते हैं, लेकिन गरीब रेहड़ीवाले से दो रुपये के लिए झिक-झिक करते हैं। वास्तव में हम ही अंदर से कंगाल हैं। यह सोचकर उन्होंने लौटकर बीस रुपये में चार भुट्टे खरीदे और मन में सुकून पाया।

दूसरी लघुकथा 'सही उत्तर' में एक शिक्षित युवक की कहानी है जो बार-बार साक्षात्कार देने के बाद भी भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के कारण असफल हो जाता था। हर तरफ भाई-भ्रष्टाचार देखकर वह निराश हो चुका था।

एक साक्षात्कार के दौरान जब अधिकारियों ने भ्रष्टाचार और रिश्वत के बारे में उसकी राय पूछी, तो उसने बिना डरे स्पष्ट और निडरतापूर्वक सत्य कहा कि भ्रष्टाचार देश के लिए कलंक है और रिश्वत इसके समान है। उसके इस सही और तार्किक उत्तर से प्रसन्न होकर अधिकारियों ने चयन कर लिया, जिससे यह साबित हुआ कि सत्य कुछ समय के लिए निराश हो सकता है, परास्त नहीं।

माइंड मैप

दो लघुकथाएँ

  • कंगाल (प्रथम कथा)
    • पहाड़ों की यात्रा और सुकून
    • भुट्टेवाले से मोल-भाव
    • अंदर से कंगाल होने की सोच
  • सही उत्तर (दूसरी कथा)
    • बेरोजगारी और भ्रष्टाचार
    • साक्षात्कार में बेबाक राय
    • सत्य की अंततः जीत
  • लेखिका परिचय
    • नरेंद्रकौर छाबड़ा
    • मेरी चुनिंदा लघुकथाएँ
  • मुख्य संदेश
    • गरीबों का शोषण न करना
    • ईमानदारी और सत्य का मार्ग

घटनाओं का क्रम

  1. भीषण गरमी से राहत पाने के लिए पर्वतीय स्थल की यात्रा पर जाना
  2. झील किनारे टहलते समय भुट्टेवाले से पाँच रुपये का भुट्टा खरीदने पर मोल-भाव करना
  3. अमीरों द्वारा बड़े होटलों में खुले हाथ खर्च करने और गरीबों से कंजूसी करने के द्वंद्व को समझना
  4. अपनी भूल सुधारते हुए अधिक पैसे देकर भुट्टे खरीदना और मानसिक सुकून पाना
  5. युवक का बार-बार साक्षात्कारों में असफल होना और भ्रष्ट व्यवस्था से निराश होना
  6. अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार पर राय पूछने पर युवक द्वारा निडरता से सत्य बयां करना
  7. युवक के तार्किक और सही उत्तर से प्रभावित होकर अधिकारियों द्वारा उसका चयन करना

पात्र परिचय

पात्रविशेषताएँ
लेखिका (कथा वाचिका)संवेदनशील, आत्मविश्लेषणी, अपनी गलती तुरंत स्वीकार करने वाली
निराश युवकयोग्य, ईमानदार, निडर और सत्यवादी

विषय और संदेश

गरीबों के प्रति संवेदनशीलता

बड़ी दुकानों पर बिना मोल-भाव किए पैसे देना और गरीबों से दो रुपये के लिए मोल-भाव करने की दोहरी मानसिकता पर प्रहार।

भ्रष्टाचार और सत्य की जीत

नौकरी में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के बोलबाला के बीच सत्य और योग्यता के बल पर सफलता हासिल करना।

याद रखने योग्य मुख्य बिंदु

  • लेखिका नरेंद्रकौर छाबड़ा जी ने समाज की दो अलग-अलग वास्तविकताओं को लघुकथाओं के माध्यम से उजागर किया है।
  • पहली लघुकथा सिखाती है कि हमें गरीबों और रेहड़ीवालों से सामान खरीदते वक्त अनावश्यक मोल-भाव नहीं करना चाहिए।
  • दूसरी लघुकथा दर्शाती है कि समाज में भले ही भ्रष्टाचार का बोलबाला हो, लेकिन सत्य को कभी परास्त नहीं किया जा सकता।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
भीषणभयानक (terrible/severe)
लिजलिजेसीलनभरा (damp/humid)
नीरवताएकांत, एकदम शांत (silence)
कंगालगरीब, निर्धन (destitute/poor)
साक्षात्कारमुलाकात (interview)
रिश्वतघूस (bribe)
सीना तानकर खड़े रहनानिर्भय होकर खड़े रहना (standing fearlessly)
बोलबाला होनाप्रभाव होना (dominance/prevalence)
दाद देनाप्रशंसा करना (to praise)

अलंकार और काव्य सौंदर्य

अलंकार/विशेषताउदाहरणस्पष्टीकरण
मुहावरासीना तानकर खड़े रहनावृक्षों की दृढ़ता और निर्भयता को दर्शाने के लिए सुंदर प्रयोग।
व्यंग्यभ्रष्टाचार एक ऐसा कीड़ा है जो देश को घुन की तरह खा रहा हैसमाज में फैले भ्रष्टाचार की विसंगति पर करारा कटाक्ष।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

Q1. लेखिका और उनके साथी ने भुट्टेवाले के साथ क्या व्यवहार किया?

लेखिका ने भुट्टेवाले से भुट्टे का दाम पूछा जो उसने पाँच रुपये बताया। इस पर लेखिका ने शहर के दो रुपये का हवाला देकर तीन रुपये में भुट्टा देने को कहा और दाम कम न करने पर भुट्टा खरीदे बिना आगे बढ़ गईं।

Q2. लेखिका के मन में अचानक क्या विचार आया जिससे उनके कदम ठिठक गए?

लेखिका के मन में विचार आया कि हम जैसे लोग पहाड़ों पर घूमने के शौक में हजारों रुपये खर्च करते हैं, बड़े होटलों और दुकानों में बिना दाम पूछे पैसे देते हैं, लेकिन गरीब से दो रुपये के लिए झिक-झिक करते हैं। यह सोचकर वे ठिठक गईं।

Q3. युवक को पहले नौकरी क्यों नहीं मिल पा रही थी?

हर जगह भ्रष्टाचार और रिश्वत का बोलबाला होने के कारण योग्यता होने के बावजूद युवक के प्रमाणपत्र और साक्षात्कार उसे सफलता नहीं दिला पा रहे थे।

Q4. साक्षात्कार में अधिकारियों ने युवक से क्या प्रश्न पूछा?

साक्षात्कार प्रतिनिधिमंडल में से एक अधिकारी ने भ्रष्टाचार के बारे में राय पूछी और दूसरे अधिकारी ने रिश्वत के संबंध में प्रश्न किया।

Q5. अंततः अधिकारियों द्वारा युवक का चयन क्यों किया गया?

युवक ने बिना किसी डर के भ्रष्टाचार और रिश्वत पर अपने बिल्कुल स्पष्ट, तार्किक और सही विचार रखे, जिससे प्रभावित होकर अधिकारियों ने उसके सही उत्तर की दाद देते हुए उसका चयन कर लिया।

Q6. संसार तालिका पूर्ण कीजिए: गरमी की विशेषताएँ

दिन अंगारे से तपे रहते थे; रातों में लू और उमस से चैन नहीं मिलता था।

Q7. कारण लिखिए: युवक को पहले नौकरी न मिल सकी।

कारण: हर जगह भ्रष्टाचार और रिश्वत का बोलबाला होने के कारण।

Q8. कृति पूर्ण कीजिए: लोग रिश्वत देकर ये लाभ उठाते हैं

रुके हुए कार्य कराना, दबी हुई फाइलें निकलवाना, टलती हुई पदोन्नति पाना और रोकी गई नौकरी हासिल करना।

Q9. पाठ से मिलने वाला मुख्य संदेश अपने शब्दों में लिखिए।

पाठ से यह संदेश मिलता है कि हमें गरीबों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे मोल-भाव नहीं करना चाहिए तथा जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, हमेशा सत्य और ईमानदारी का मार्ग अपनाना चाहिए क्योंकि सत्य परास्त नहीं हो सकता।

परीक्षा टिप्स

  • दोनों लघुकथाओं के मुख्य पात्रों और उनके विचारों को अच्छी तरह याद रखें।
  • शब्द-संसार में दिए गए कठिन शब्दों के अर्थ और मुहावरे परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
  • कारण स्पष्ट कीजिए और संजाल पूर्ण कीजिए जैसे प्रश्नों के उत्तर लिखते समय सीधे पाठ के तथ्यों का प्रयोग करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस पाठ की लेखिका कौन हैं?

इस पाठ की लेखिका जानी-मानी कथाकार नरेंद्रकौर छाबड़ा जी हैं।

‘दो लघुकथाएँ’ किस विधा की रचना है?

यह गद्य विभाग के अंतर्गत 'पूरक पठन' (सहायक वाचन) विधा की रचना है।

दूसरी लघुकथा 'सही उत्तर' से क्या सीख मिलती है?

इससे यह सीख मिलती है कि सत्य कुछ समय के लिए निराश हो सकता है, लेकिन अंततः सत्य की ही जीत होती है।

ये नोट्स बालभारती हिंदी लोकभारती पाठ्यपुस्तक (2026-27) से AI की सहायता से तैयार किए गए हैं और पाठ्यपुस्तक से जाँचे गए हैं।

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