Hum Is Dharti Ki Santati Hain Notes & Questions Class 10 SSC [हम इस धरती की संतति हैं]
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यह पाठ एक पूरक पठन है जो कव्वाली विद्या पर आधारित है। इसके रचनाकार उमाकांत मालवीय हैं। इस कव्वाली में लड़कों और लड़कियों के दो दलों की नोक-झोंक के माध्यम से भारत के महान ऐतिहासिक और पौराणिक स्त्री-पुरुष पात्रों का सुंदर वर्णन किया गया है।
रचनाकार परिचय
उमाकांत मालवीय का जन्म १९३१ में मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ तथा मृत्यु १९८२ में इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में हुई। आपको हिंदी साहित्य में नवगीत का भगीरथ कहा जाता है।
सारांश
कव्वाली सात सौ वर्ष पुरानी एक लोकप्रिय काव्य विधा है जिसमें किसी की शान या तारीफ में गीत गाए जाते हैं। प्रस्तुत पाठ में लड़कों और लड़कियों के दो दल आपस में नोक-झोंक करते हैं और अपनी-अपनी महान माटी की विशेषता बताते हैं।
लड़कों का दल ध्रुव, प्रह्लाद, भरत और जयमल-पत्ता जैसे शूरवीर और दृढ़निश्चयी पुरुषों का उदाहरण देता है, जो अपनी लगन के सच्चे थे और शेरों के जबड़े खुलवाकर दाँत गिनते थे।
लड़कियों का दल झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, रजिया सुल्तान, दुर्गावती, चाँदबीबी, पद्मिनी के जौहर और सीता-सावित्री जैसी महान वीरांगनाओं का स्मरण कराता है जो मर्दानी की तरह लड़ी थीं।
अंत में दोनों दलों की तनातनी को समाप्त करते हुए यह बात सामने आती है कि लड़का हो या लड़की, ध्रुव हो या रजिया, सभी भारत माता की ही संतान हैं और भारत माता के रथ के दो पहिये हैं। आपस में झगड़ने से कुछ हासिल नहीं होता।
माइंड मैप
हम इस धरती की संतति हैं
- कव्वाली विधा
- सात सौ वर्ष पुरानी
- लोकप्रिय काव्य विधा
- दलगत प्रस्तुति
- लड़कों का दल
- ध्रुव और प्रह्लाद
- भरत (शेरों के दाँत गिनना)
- जयमल-पत्ता
- लड़कियों का दल
- रानी लक्ष्मीबाई
- रजिया सुल्ताना व दुर्गावती
- चाँदबीबी, पद्मिनी, सीता, सावित्री
- अंतिम संदेश
- आपस में झगड़ा व्यर्थ
- भारत माँ के रथ के दो पहिए
- हम सब एक ही धरती की संतति
कव्वाली के विकास के चरण
- लड़कों के समूह द्वारा अपने पक्ष के शूरवीरों की प्रशंसा करना
- लड़कों द्वारा लड़कियों को चुप रहने और शेखी न बघारने के लिए कहना
- लड़कियों के समूह द्वारा अपनी माटी की महान वीरांगनाओं का वर्णन करना
- लड़कियों द्वारा लड़कों को ताने सहने की चेतावनी देना
- दोनों समूहों के बीच बात उलझाने और टंटे को लेकर बहस होना
- निष्कर्ष के रूप में दोनों का भारत माता के रथ के दो पहिये होना स्वीकार करना
विषय और संदेश
स्त्री-पुरुष समानता
कवि ने लड़के और लड़की दोनों को भारत माता के रथ के दो पहिये बताकर दोनों की समान महत्ता और गरिमा को स्थापित किया है।
देशभक्ति और गौरव
भारत की पावन माटी में जन्म लेने वाले महान ऐतिहासिक तथा पौराणिक स्त्री-पुरुषों के शौर्य और त्याग का स्मरण कर देश के प्रति गौरव भाव जगाना।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- कव्वाली तारीफ या शान में गाई जाने वाली एक लोकप्रिय काव्य विधा है जिसका इतिहास सात सौ वर्ष पुराना है.
- इस रचना में पहला पद लड़कों का समूह, दूसरा पद लड़कियों का समूह और अंतिम पद दोनों समूह मिलकर प्रस्तुत करते हैं.
- ध्रुव, प्रह्लाद, भरत, जयमल-पत्ता ऐतिहासिक और पौराणिक पुरुष पात्र हैं.
- लक्ष्मीबाई, रजिया सुल्ताना, दुर्गावती, चाँदबीबी, पद्मिनी, सीता और सावित्री महान स्त्री पात्र हैं.
- लड़का और लड़की दोनों भारत माता के रथ के दो पहिये हैं.
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| दतुुली | दाँत (teeth) |
| शऊर | अच्छी तरह काम करने की योग्यता या ढंग, बुद्धि (manner / know-how) |
| जौहर | राजस्व समय में प्रचलित प्रथा जिसमें स्त्रियाँ अग्नि में प्रवेश कर प्राण त्याग देती थीं (sacrificial self-immolation practice) |
| खफा | अप्रसन्न, नाराज, रुष्ट, कुद्ध (angry / annoyed) |
| टंटा | व्यर्थ का झंझट, झगड़ा, लड़ाई (quarrel / trouble) |
| शेखी बघारना | स्वयं अपनी प्रशंसा करना (boasting) |
| डींग मारना | बड़ी-बड़ी बातें करना (bragging) |
| संतति | संतान, औलाद (descendants / children) |
अलंकार और काव्य सौंदर्य
| अलंकार/विशेषता | उदाहरण | स्पष्टीकरण |
|---|---|---|
| प्रश्नालंकार / संवाद शैली | यों आप खफा क्यों होती हैं, टंटा काहे का | कवि ने संवाद और प्रश्न के माध्यम से कविता को जीवंत और रोचक बनाया है। |
| रूपक अलंकार | भारत माता के रथ के हैं हम दोनों ही दो-दो पहिये | लड़के और लड़कियों को भारत माता के रथ के दो पहिये के रूप में दर्शाया गया है। |
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
Q1. पद्यांश में उल्लिखित चरित्रों का वर्गीकरण ऐतिहासिक और पौराणिक आधार पर कीजिए।
पौराणिक चरित्र: ध्रुव, प्रह्लाद, भरत, सीता, सावित्री। ऐतिहासिक चरित्र: लक्ष्मीबाई, रजिया सुलताना, दुर्गावती, पद्मिनी, चाँदबीबी, जयमल।
Q2. विशेषताओं के आधार पर पात्र पहचानिए: (१) भारत माता के रथ के दो पहिये (२) खूब लड़ने वाली मर्दानी (३) अपनी लगन का सच्चा (४) किसी को कुछ न गिनने वाले।
(१) लड़के और लड़कियाँ (२) रजिया सुल्ताना, दुर्गावती, लक्ष्मीबाई (३) प्रह्लाद (४) जयमल-पत्ता।
Q3. सही या गलत पहचानकर गलत वाक्य को सुधारकर पुनः लिखिए: 'रानी कर्मवती ने अकबर को राखी भेजी थी।'
यह वाक्य गलत है। कविता के आधार पर सही वाक्य है: 'झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, रजिया सुल्ताना, दुर्गावती आदि वीरांगनाओं ने वीरता दिखाई।' (नोट: पाठ्यपुस्तक के अनुसार झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, रजिया सुल्ताना आदि का वर्णन है)।
Q4. कविता से क्या संदेश प्राप्त होता है?
कविता से यह संदेश प्राप्त होता है कि स्त्री और पुरुष दोनों का समाज में समान स्थान है। लड़का और लड़की दोनों भारत माता के रथ के दो पहिये हैं, इसलिए आपस में झगड़ने या श्रेष्ठता साबित करने के बजाय मिलकर देश की उन्नति करनी चाहिए।
Q5. कव्वाली विधा के बारे में संक्षेप में लिखिए।
कव्वाली तारीफ या शान में गाया जाने वाला गीत या कविता है। यह एक लोकप्रिय काव्य विधा है जिसका इतिहास सात सौ वर्ष पुराना है। इसमें दलों के बीच नोक-झोंक प्रस्तुत की जाती है।
Q6. लड़कों के दल ने अपनी माटी की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?
लड़कों के दल ने बताया कि इस माटी में ध्रुव जैसे बच्चे खेले, प्रह्लाद जैसे अपनी लगन के सच्चे भक्त हुए, भरत शेरों के जबड़े खुलवाकर दाँत गिनते थे और जयमल-पत्ता किसी को कुछ नहीं गिनते थे।
Q7. लड़कियों के दल ने किन वीरांगनाओं का स्मरण कराया है?
लड़कियों के दल ने झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, रजिया सुलताना, दुर्गावती, चाँदबीबी, पद्मिनी के जौहर की ज्वाला तथा सीता और सावित्री जैसी महान बालाओं का स्मरण कराया है।
Q8. आपस में झगड़ने से क्या परिणाम होता है, कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
कविता के अनुसार झगड़े से कुछ हासिल नहीं होता, बल्कि बातें उलझ जाती हैं। लड़का हो या लड़की, दोनों आपस में लड़ने के बजाय भारत माता के रथ के दो पहिये बनकर साथ चलते हैं।
परीक्षा टिप्स
- कविता में आए सभी ऐतिहासिक और पौराणिक पात्रों के नाम अच्छे से याद रखें ताकि वर्गीकरण संबंधी कृति हल करने में आसानी हो।
- कव्वाली विधा का परिचय और उसका इतिहास (सात सौ वर्ष पुराना) परीक्षा में पूछा जा सकता है, इसे ध्यान रखें।
- मुहावरों के अर्थ और उनके वाक्य प्रयोग का अभ्यास अवश्य करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह पाठ किस विधा में लिखा गया है?
यह पाठ कव्वाली विधा में लिखा गया एक पूरक पठन है।
कव्वाली का इतिहास कितने वर्ष पुराना है?
कव्वाली का इतिहास सात सौ वर्ष पुराना है।
इस कविता के रचनाकार कौन हैं?
इस कविता के रचनाकार उमाकांत मालवीय जी हैं।
ये नोट्स बालभारती हिंदी लोकभारती पाठ्यपुस्तक (2026-27) से AI की सहायता से तैयार किए गए हैं और पाठ्यपुस्तक से जाँचे गए हैं।
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