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Jab Tak Zinda Rahun Likhta Rahun Notes & Questions | Class 10 SSC

Doubtly 1 min read Updated 25 Oct 2026 Save WhatsApp
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यह पाठ विश्वनाथ प्रसाद तिवारी द्वारा प्रसिद्ध साहित्यकार अमृतलाल नागर जी से लिया गया एक साक्षात्कार है। इस साक्षात्कार में नागर जी के साहित्यिक आरंभ, उनके जीवन पर पड़े राजनीतिक और सामाजिक प्रभावों तथा उनकी लेखन शैली पर चर्चा की गई है।

रचनाकार परिचय

विश्वनाथ प्रसाद तिवारी जी हिंदी जगत के जाने-माने कवि, लेखक, आलोचक एवं संपादक हैं। आप देश, काल और वातावरण के प्रति सजग और संवेदनशील रचनाकार हैं।

सारांश

पाठ की शुरुआत विश्वनाथ प्रसाद तिवारी द्वारा अमृतलाल नागर जी के साहित्यिक आरंभ के बारे में पूछने से होती है। नागर जी बताते हैं कि उन्होंने लिखने से पहले पढ़ना शुरू किया था और छापे का अक्षर उनका पहला मित्र था। उनके घर में 'सरस्वती' और 'गृहलक्ष्मी' पत्रिकाएँ आती थीं। उन्होंने बंकिमचंद्र, प्रेमचंद, शरतचंद्र और कौशिक के साहित्य का अध्ययन किया था।

नागर जी की पहली कहानी 'अपशकुन' १९३३ में छपी और 'प्रायश्चित' गरीबों के प्रति करुणा का प्रमाण है।

साहित्यिक संपर्क के बारे में बताते हुए नागर जी ने जगन्नाथदास रत्नाकर, प्रेमचंद, शरतचंद्र और तुलसीदास आदि का स्मरण किया। तुलसीदास का 'रामचरितमानस' उन्हें घूटी में पिलाया गया था। उन्होंने अखंड भारतवर्ष का भ्रमण किया जिससे उन्हें विभिन्न चरित्रों के मनोविज्ञान को समझने का अवसर मिला।

साक्षात्कार के अंत में नागर जी अपने स्वास्थ्य और पत्नी की मृत्यु के बाद उपजी टूटटन का जिक्र करते हुए कहते हैं कि लिखने के सिवा और कोई चारा नहीं है। वे कामना करते हैं कि जब तक वे जिंदा रहें, लिखते रहें।

माइंड मैप

जब तक जिंदा रहूँ, लिखता रहूँ

  • साहित्यिक आरंभ
    • छापे का अक्षर पहला मित्र
    • सरस्वती और गृहलक्ष्मी पत्रिकाएँ
    • बंकिमचंद्र और प्रेमचंद के उपन्यास
  • प्रेरणा व अनुभव
    • साइमन कमीशन का बहिष्कार
    • पहली कविता 'कब लौं कहौं लाठी खाय!'
    • पिता जी के संस्कारों का प्रभाव
  • प्रमुख रचनाएँ
    • पहली कहानी 'अपशकुन'
    • पहला उपन्यास 'महाकाल'
    • अन्य कृतियाँ 'खंजन नयन', 'गदर के फूल'
  • लेखन दर्शन
    • अखंड भारत का भ्रमण
    • मन और प्राण का संबंध
    • जब तक जिंदा रहूँ, लिखता रहूँ

साक्षात्कार का घटनाक्रम

  1. लेखन की शुरुआत और बचपन के पठन का माहौल
  2. साइमन कमीशन के बहिष्कार के समय पहली कविता का रचना
  3. राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों का प्रभाव तथा पहली कहानी का प्रकाशन
  4. देशभर का भ्रमण और विभिन्न लेखकों से संपर्क
  5. उपन्यास लेखन और जीवन के अंतिम समय तक लिखने का संकल्प

विषय और संदेश

साहित्यिक साधना और निरंतरता

अमृतलाल नागर जी का पूरा जीवन साहित्य सृजन को समर्पित रहा। विपरीत परिस्थितियों और दुखों के बावजूद उनका यह संकल्प कि 'जब तक जिंदा रहूँ, लिखता रहूँ' उनकी अटूट साहित्यिक निष्ठा को दर्शाता है।

समाज और संवेदना का प्रभाव

लेखक के व्यक्तित्व और लेखन पर समाज, पारिवारिक संस्कारों, महात्मा गांधी और तुलसी जैसे महापुरुषों का गहरा प्रभाव पड़ा, जो उनकी रचनाओं में झलकता है।

याद रखने योग्य मुख्य बिंदु

  • अमृतलाल नागर जी के बचपन में उनके घर 'सरस्वती' और 'गृहलक्ष्मी' पत्रिकाएँ आती थीं।
  • उनकी पहली कविता साइमन कमीशन के बहिष्कार के समय १९२८-१९२९ में 'कब लौं कहौं लाठी खाय!' के रूप में फूटी।
  • उनकी पहली कहानी 'अपशकुन' १९३३ में छपी थी।
  • नागर जी का पहला उपन्यास 'महाकाल' १९४४ में लिखा गया जो १९४६ में प्रकाशित हुआ और बाद में 'भूख' नाम से प्रकाशित हुआ।
  • नागर जी तुलसीदास को अपना आदर्श मानते थे और बचपन में उनसे 'रामचरितमानस' पढ़वाया जाता था।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
साहित्यिकसाहित्य से संबंधित (literary)
बहिष्कारत्याग करना, निकाल देना (boycott)
शैलीप्रणाली, रीति, तरीका (style)
भ्रमणघूमना, फिरना (wandering/travel)
संकलनसंग्रह (collection)
करुणादया, सहानुभूति (compassion)
संस्कारअच्छे विचार और आदतें (cultural values)
मनोविज्ञानमन का विज्ञान या अध्ययन (psychology)
सार्थकताउचित होना, महत्व (significance/meaningfulness)
साक्षात्कारआमने-सामने की बातचीत (interview)

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

Q1. नागर जी की पहली कविता कब और किस अनुभव के आधार पर फूटी?

नागर जी की पहली कविता साइमन कमीशन के बहिष्कार के समय १९२८-१९२९ में हुए लाठीचार्ज के अनुभव से फूटी, जिसका शीर्षक 'कब लौं कहौं लाठी खाय!' था।

Q2. नागर जी अपने पिता जी के किस गुण से बहुत प्रभावित थे?

नागर जी अपने पिता जी के इस गुण से प्रभावित थे कि वे किसी के भी दुख-दर्द में तुरंत सहायता के लिए पहुँच जाते थे।

Q3. नागर जी के अनुसार उनकी पहली कहानी कौन सी थी?

नागर जी के अनुसार उनकी पहली कहानी 'अपशकुन' थी, जो १९३३ में छपी थी।

Q4. पुराने साहित्यकारों में नागर जी किसे अपना आदर्श मानते थे?

पुराने साहित्यकारों में नागर जी तुलसीदास को अपना आदर्श मानते थे, जिनकी रचना 'रामचरितमानस' उन्हें बचपन में घूटी की तरह पिलाई गई थी।

Q5. नागर जी का पहला उपन्यास कौन सा था और वह कब प्रकाशित हुआ?

नागर जी का पहला उपन्यास 'महाकाल' था, जिसे उन्होंने १९४४ में लिखा और यह १९४६ में प्रकाशित हुआ।

Q6. देशभर के भ्रमण का नागर जी को क्या लाभ मिला?

देशभर के भ्रमण से नागर जी को यह लाभ हुआ कि उन्होंने बहुत से चरित्रों (characters) को देखा और उनके मनोविज्ञान को अच्छी तरह समझने का अवसर मिला।

Q7. पत्नी की मृत्यु के बाद नागर जी के जीवन में क्या बदलाव आया?

पत्नी की मृत्यु के बाद नागर जी के जीवन में एक टूटटन आ गई थी, लेकिन उन्होंने सोचा कि लिखने के सिवा और कोई चारा नहीं है और कामना की कि जब तक वे जिंदा रहें, लिखते रहें।

Q8. नागर जी के बचपन में उनके घर कौन सी दो पत्रिकाएँ मँगाई जाती थीं?

नागर जी के बचपन में उनके घर 'सरस्वती' और 'गृहलक्ष्मी' नामक दो पत्रिकाएँ मँगाई जाती थीं।

परीक्षा टिप्स

  • पाठ के लेखक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी और साक्षात्कारदाता अमृतलाल नागर जी के नाम अच्छी तरह याद रखें।
  • नागर जी की प्रमुख रचनाओं (जैसे 'अपशकुन', 'महाकाल', 'खंजन नयन', 'गदर के फूल') और उनके प्रकाशन वर्ष के आंकड़ों को ध्यान में रखें।
  • भाषा बिंदु के अंतर्गत मुख्य और सहायक क्रिया तथा कारक चिह्नों के व्याकरणिक नियमों का अभ्यास करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस पाठ के लेखक कौन हैं?

इस पाठ के लेखक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी हैं, जिन्होंने अमृतलाल नागर जी का साक्षात्कार लिया है।

अमृतलाल नागर जी का पहला उपन्यास कौन सा है?

अमृतलाल नागर जी का पहला उपन्यास 'महाकाल' है, जो १९४६ में प्रकाशित हुआ था।

नागर जी ने अपनी पहली कविता कब लिखी?

नागर जी ने अपनी पहली कविता साइमन कमीशन के बहिष्कार के समय १९२८-१९२९ में लाठीचार्ज के अनुभव पर लिखी थी।

ये नोट्स बालभारती हिंदी लोकभारती पाठ्यपुस्तक (2026-27) से AI की सहायता से तैयार किए गए हैं और पाठ्यपुस्तक से जाँचे गए हैं।

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