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Krishak Ka Gaan Notes, Summary, Questions Class 10 SSC

Doubtly 1 min read Updated 25 Oct 2026 Save WhatsApp
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यह पाठ दिनेश भारद्वाज जी द्वारा रचित एक संवेदनशील गीत है। पद्य संबंधी के अनुसार, यह गीत कृषक के जीवन पर आधारित है जिसमें अन्नदाता की दुर्दशा का वर्णन करते हुए कवि उसका महत्व और सम्मान पुनः स्थापित करना चाहता है।

रचनाकार परिचय

दिनेश भारद्वाज जी का जन्म सन १९४३ में मुरैना (मध्य प्रदेश) में हुआ था। आपकी रचनाएँ जमीन से जुड़ी रहती हैं और उनमें देश की मिट्टी की सुगंध आती है। आपकी प्रमुख कृतियों में 'जनम और जिंदगी', 'तृष्णा से तृप्ति तक' (कविता संग्रह) तथा 'एकात्म' (दोहा संग्रह) शामिल हैं।

सारांश

किसान संतोष की तलवार लेकर आगे बढ़ रहा है और संसार में वसंत आने पर भी उसके हिस्से में हमेशा पतझड़ ही रहता है।

किसान स्वयं सारा परिश्रम करके दूसरों के लिए मधुरस तैयार करता है, परंतु ईश्वर द्वारा धूप और छाँह एक समान मिलने के बावजूद उसकी अपनी जिंदगी संघर्षों से भरी रहती है। कवि मानवता के ध्वज तले ऐसे मेहनतकश किसान का आह्वान करना चाहता है और उसका सम्मान करना अपना कर्तव्य समझता है।

वह अपने कमजोर व बलहीन शरीर को पत्तियों से पालता है और ऊसर जमीन को अपने खून से उर्वरा बना देता है।

माइंड मैप

कृषक का गान

  • कवि परिचय
    • दिनेश भारद्वाज
    • जन्म: १९४३, मुरैना
    • रचनाएँ: तृष्णा से तृप्ति तक
  • किसान की स्थिति
    • संतोष की तलवार
    • हिस्से में पतझड़
    • दूसरों के लिए मधुरस
  • कवि की चाहत
    • कृषक का सम्मान
    • नव सृष्टि का निर्माण
    • किसान का ध्यान
  • कृषक का श्रम
    • ऊसर को उर्वरा बनाना
    • कमजोर शरीर से संघर्ष
    • कण-कण जोड़ना

कविता का विकास क्रम

  1. संतोषी स्वभाव के साथ जीवन बिताना
  2. संसार के लिए श्रम कर मधुरस बनाना
  3. विश्व का पालन करने वाले की दुर्दशा देखना
  4. कमजोर तन और ऊसर जमीन को उपजाऊ बनाना
  5. कवि द्वारा कृषक के सम्मान और नव सृजन का संकल्प

विषय और संदेश

अन्नदाता का संघर्ष

किसान पूरी दुनिया का पेट भरता है, परंतु स्वयं कष्ट सहकर जीवन जीता है।

श्रम का सम्मान

कवि समाज में कृषक के योगदान को पहचान कर उसका गौरव और सम्मान पुनः स्थापित करना चाहता है।

याद रखने योग्य मुख्य बिंदु

  • गीत के रचनाकार दिनेश भारद्वाज हैं और यह कविता 'गीतों का अवतार' गीत संग्रह से ली गई है।
  • किसान संसार में वसंत जैसी खुशियाँ लाता है, पर उसके अपने जीवन में पतझड़ रहता है।
  • किसान अपनी मेहनत से बंजर (ऊसर) भूमि को उपजाऊ (उर्वरा) बनाता है।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
मधुमासवसंत ऋतु (Spring season)
सृजकरचना करने वाला, सर्जक (Creator)
मनुजतामनुष्यता (Humanity)
पालितपाला हुआ, आश्रित (Nurtured/Dependent)
ऊसरबंजर, अनुपजाऊ (Barren land)
उर्वराउपजाऊ भूमि (Fertile land)
नीड़घोंसला (Nest)

अलंकार और काव्य सौंदर्य

अलंकार/विशेषताउदाहरणस्पष्टीकरण
प्रतीक योजनासंतोष की तलवारसंतोष को तलवार का रूप देकर किसान की सहनशक्ति और संघर्षशीलता को दर्शाया गया है।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

Q1. कविता के आधार पर निर्माता, शरीर, राक्षस और मानव के लिए प्रयुक्त शब्द लिखिए।

निर्माता - सृजक, शरीर - तन, राक्षस - असुर, मानव - मनुज।

Q2. वाक्य पूर्ण कीजिए: १. कृषक कमजोर शरीर को ------ २. कृषक बंजर जमीन को ------

१. कृषक कमजोर शरीर को पत्तियों से पालता है। २. कृषक बंजर जमीन को अपने खून से उर्वरा बना देता है।

Q3. निम्नलिखित पंक्तियों में कवि के मन में कृषक के प्रति जागृत होने वाले भाव लिखिए: (१) आज उसपर मान कर लूँ (२) आह्वान उसका आज कर लूँ

(१) कृषक के त्याग और संतोषी स्वभाव के प्रति गौरव और सम्मान का भाव। (२) समाज में किसान के श्रम को पहचानकर उसका समर्थन और आह्वान करने का भाव।

Q4. कविता में प्रयुक्त ऋतुओं के नाम लिखिए।

कविता में मधुमास (वसंत ऋतु) और पतझर (पतझड़ ऋतु) का उल्लेख आया है।

Q5. कृषक किन स्थितियों में अविचल रहता है?

कृषक अपने जीवन में दीनता को ही अपना अभिमान मानकर, चारों तरफ पतझड़ जैसी विषम परिस्थितियों के होने पर भी संतोष की तलवार लेकर अपने मार्ग पर अविचल रहता है।

Q6. कविता की प्रथम चार पंक्तियों का भावार्थ लिखिए।

कवि कहते हैं कि संतोष रूपी तलवार लेकर आगे बढ़ने वाले किसान के जीवन में भले ही पतझड़ जैसी उदासी छाई रहे, फिर भी वह सबकी भलाई करता है। कवि उसकी दीनता को ही उसका अभिमान मानकर उसका सम्मान करना चाहता है।

Q7. निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर पद्य विश्लेषण कीजिए: रचनाकार कवि का नाम, रचना का प्रकार, पसंदीदा पंक्ति, पसंदीदा होने का कारण, रचना से प्राप्त प्रेरणा।

रचनाकार कवि का नाम: दिनेश भारद्वाज, रचना का प्रकार: गीत, पसंदीदा पंक्ति: 'उस कृषक का गान कर लूँ', पसंदीदा होने का कारण: इस पंक्ति में अन्नदाता के प्रति अगाध आदर झलकता है, रचना से प्राप्त प्रेरणा: किसानों के कठिन परिश्रम का सम्मान करने की प्रेरणा मिलती है।

Q8. किसान की दुर्दशा पर प्रकाश डालते हुए कवि के दृष्टिकोण को स्पष्ट कीजिए।

कवि दिनेश भारद्वाज देखते हैं कि पूरी दुनिया का पेट भरने वाला और जगत को मधुरस देने वाला किसान खुद उपेक्षित रहता है और अपने ही पाले हुए लोगों के पैरों तले कुचला जाता है। कवि इस स्थिति को बदलना चाहता है और किसान के सम्मान को पुनः स्थापित करने का संकल्प लेता है।

परीक्षा टिप्स

  • शब्दार्थ (शब्द संसार) को अच्छी तरह याद रखें क्योंकि बोर्ड परीक्षा में समानार्थी या जोड़ियाँ मिलाने के लिए पूछे जाते हैं.
  • पद्य विश्लेषण के सभी पाँच बिंदुओं के उत्तर सटीक और छोटे लिखें.
  • कविता की पंक्तियों का भावार्थ अपने शब्दों में स्पष्ट रूप से लिखने का अभ्यास करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस कविता के कवि कौन हैं?

इस कविता के कवि दिनेश भारद्वाज जी हैं।

'कृषक का गान' कविता किस संग्रह से ली गई है?

यह कविता 'गीतों का अवतार' गीत संग्रह से ली गई है।

इस कविता का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस कविता का मुख्य उद्देश्य अन्नदाता किसान की दुर्दशा का वर्णन करते हुए समाज में उसका महत्व और सम्मान पुनः स्थापित करना है।

ये नोट्स बालभारती हिंदी लोकभारती पाठ्यपुस्तक (2026-27) से AI की सहायता से तैयार किए गए हैं और पाठ्यपुस्तक से जाँचे गए हैं।

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