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Reerdh Ki Haddi Notes Summary Questions Class 10 SSC Hindi

Doubtly 1 min read Updated 25 Oct 2026 Save WhatsApp
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यह एकांकी प्रसिद्ध नाटककार जगदीशचंद्र माथुर द्वारा रित है। इस पाठ में विवाह जैसे गंभीर विषय पर समाज की पुरानी और संकुचित सोच तथा स्त्री शिक्षा के महत्त्व को बहुत ही प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

रचनाकार परिचय

जगदीशचंद्र माथुर का जन्म सन १९१७ में बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था और उनका निधन सन १९७८ में हुआ था। आप एक वरिष्ठ साहित्यकार, संस्कृति पुरुष और प्रसिद्ध नाटककार थे।

सारांश

बाबू रामस्वरूप अपनी बेटी उमा की शादी के लिए गोपाल प्रसाद और उनके पढ़ी-लिखे बेटे शंकर का स्वागत करने की तैयारी कर रहे हैं। गोपाल प्रसाद और शंकर रूढ़िवादी विचारों के हैं और चाहते हैं कि लड़की कम पढ़ी-लिखी हो ताकि वह उनके इशारों पर चल सके।

घर आने पर गोपाल प्रसाद और रामस्वरूप के बीच बातचीत होती है। गोपाल प्रसाद आधुनिक शिक्षा के नाम पर केवल डिग्री और 'बिजनेस' की बातें करते हैं, जबकि उनके बेटे शंकर में खुद का कोई व्यक्तित्व नहीं है और वह हमेशा झुककर बैठता है।

जब उमा चाय और पान लेकर कमरे में आती है, तो गोपाल प्रसाद और शंकर उसे चश्मे में देखकर चौंक जाते हैं। रामस्वरूप बात को संभालने के लिए कहते हैं कि आँखों में कुछ परेशानी के कारण चश्मा लगाना पड़ा है।

जब उमा चाय और पान लेकर कमरे में आती है, तो उसका चेहरा ऊपर उठने पर उसकी नाक पर रखा सुनहरी रिमवाला चश्मा देखकर गोपाल प्रसाद और शंकर चौंक जाते हैं।

अंत में जब उमा से जवाब देने को कहा जाता है, तो वह साहस जुटाकर अपनी बात रखती है। वह निडर होकर बताती है कि वह बी.ए. पास है और वह कोई वस्तु या कुर्सी-मेज नहीं है, बल्कि एक आत्मसम्मान वाली इंसान है।

उमा गोपाल प्रसाद और शंकर के दोहरे चरित्र का पर्दाफाश करती है और शंकर को 'रीढ़ की हड्डी' (आत्मबल और व्यक्तित्व)हीन बताती है। अंत में गोपाल प्रसाद और शंकर बेबस होकर वहाँ से गुस्से में चले जाते हैं।

माइंड मैप

रीढ़ की हड्डी

  • पात्र परिचय
    • उमा - सुशिक्षित और साहसी युवती
    • रामस्वरूप - उमा के पिता
    • गोपाल प्रसाद - शंकर के रूढ़िवादी पिता
    • शंकर - उच्च शिक्षा प्राप्त पर कायर युवक
  • मेहमानों का आगमन
    • तखत बिछाना और नाश्ता
    • खूबसूरती पर चर्चा
  • लड़की की परीक्षा
    • गाना और सितार बजाना
    • सिलाई और पेंटिंग पूछना
  • उमा का विद्रोह
    • बी.ए. पास होने का खुलासा
    • लड़के के चरित्र की पोल खोलना

एकांकी की घटनाओं का क्रम

  1. रामस्वरूप और नौकर रतन द्वारा कमरे में तखत बिछाना
  2. गोपाल प्रसाद और उनके बेटे शंकर का रामस्वरूप के घर पहुँचना
  3. चाय-नाश्ते के दौरान खूबसूरती और शिक्षा पर रूढ़िवादी चर्चा
  4. उमा का कमरे में आना और मेहमानों द्वारा उसका निरीक्षण करना
  5. उमा का साहसी रूप से सामने आना और अपनी शिक्षा बताना
  6. शंकर के पुराने कारनामों का पर्दाफाश होना
  7. गोपाल प्रसाद और शंकर का बेइज्जती महसूस कर वापस लौटना

पात्र परिचय

पात्रविशेषताएँ
उमासुशिक्षित, स्वाभिमानी, साहसी और स्पष्टवक्ता युवती जो अन्याय के खिलाफ आवाज उठाती है।
रामस्वरूपबेटी के पिता जो मजबूरी में अपनी बेटी की उच्च शिक्षा को छिपाने का प्रयास करते हैं।
गोपाल प्रसाददकियानूसी सोच वाले, घमंडी और महिलाओं को कमतर आंकने वाले व्यक्ति।
शंकरकमजोर व्यक्तित्व वाला, रीढ़ की हड्डीहीन और चरित्रहीन युवक।

विषय और संदेश

स्त्री शिक्षा का महत्त्व

पाठ में यह दर्शाया गया है कि लड़कियों को भी लड़कों की तरह उच्च शिक्षा प्राप्त करने का पूरा अधिकार है।

रूढ़िवादी सोच पर प्रहार

समाज में लड़कियों को सामान या वस्तु समझने की पुरानी और संकुचित सोच का विरोध किया गया है।

नारी का स्वाभिमान

एक नारी अबला नहीं है, बल्कि वह अपने आत्मसम्मान के लिए आवाज उठा सकती है।

याद रखने योग्य मुख्य बिंदु

  • यह एक एकांकी विधा की रचना है जिसके लेखक जगदीशचंद्र माथुर हैं।
  • नाटक में विवाह के समय लड़की की योग्यता परखने के नाम पर होने वाले अपमान को दिखाया गया है।
  • शंकर जैसे उच्च शिक्षित युवा का चरित्र खोखला और कायरतापूर्ण है।
  • उमा का संवाद समाज के दकियानूसी लोगों के मुँह पर एक करारा तमाचा है।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
तखतलकड़ी की बनी हुई बड़ी चौकी (large wooden bench)
तशतरीछोटी थाली (small plate/saucer)
खँखारनाखाँसना, गला साफ करना (to clear throat)
तक्ल्लुफशिष्टाचार, औपचारिकता (formal courtesy)
दकियानूसीपुरानी और रूढ़िवादी सोच वाले (orthodox/conservative)
बेबसीलाचारी, विवशता (helplessness)
स्वाभिमानआत्मसम्मान (self-respect)
सकपकानाघबरा जाना या झेंप जाना (to get nervous/confused)

अलंकार और काव्य सौंदर्य

अलंकार/विशेषताउदाहरणस्पष्टीकरण
प्रतीकात्मकतारीढ़ की हड्डीयहाँ 'रीढ़ की हड्डी' शारीरिक अंग न होकर मनुष्य के आत्मबल, चरित्र और व्यक्तित्व का प्रतीक है।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

Q1. उमा को चश्मा क्यों लगाना पड़ा था?

पिछले महीने में उमा की आँखें दुखने लग गई थीं, जिसके कारण उसे कुछ दिनों के लिए चश्मा लगाना पड़ा था।

Q2. गोपाल प्रसाद की दृष्टि में बहू कैसी होनी चाहिए?

गोपाल प्रसाद की दृष्टि में बहू ऐसी होनी चाहिए जो ज्यादा पढ़ी-लिखी न हो, केवल घर के कामकाज और सिलाई-पुराई जानती हो।

Q3. बाप-बेटे क्यों चौंक उठे?

जब उमा पान की तशतरी लेकर उनके सामने आई और उसका चेहरा उठा, तो उसकी नाक पर सुनहरी रिम वाला चश्मा देखकर बाप-बेटे चौंक उठे।

Q4. रामस्वरूप ने हारमोनियम और सितार उठाने को क्यों कहा था?

रामस्वरूप मेहमानों के सामने अपनी बेटी की कला (गाना-बजाना) का प्रदर्शन करवाना चाहते थे ताकि वे उसे पसंद कर लें।

Q5. उमा को गुस्सा क्यों आया?

उमा को गुस्सा इसलिए आया क्योंकि गोपाल प्रसाद और शंकर उसे किसी वस्तु या दुकान की कुर्सी-मेज की तरह नाप-तौल रहे थे और उसके स्वाभिमान को ठेस पहुँचा रहे थे।

Q6. एकांकी के शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

'रीढ़ की हड्डी' शीर्षक पूरी तरह सार्थक है। शारीरिक रूप से सीधे न बैठ पाने वाले और चरित्रहीन युवक शंकर के माध्यम से लेखक ने उन पुरुषों पर व्यंग्य किया है जिनका अपना कोई व्यक्तित्व या आत्मबल नहीं होता।

Q7. उमा के चरित्र की मुख्य विशेषताएँ लिखिए।

उमा एक सुशिक्षित, साहसी, आत्मविश्वासी और स्वाभिमानी युवती है। वह अन्याय को चुपचाप सहने के बजाय उसका डटकर मुकाबला करती है और समाज के पाखंडी लोगों को करारा जवाब देती है।

Q8. गोपाल प्रसाद और शंकर के चरित्र में क्या समानता है?

दोनों ही पुरुष प्रधान समाज की संकुचित और रूढ़िवादी सोच का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों महिलाओं को शिक्षित देखने के पक्ष में नहीं हैं और उनका मानना है कि औरतें केवल घर संभालने के लिए हैं।

परीक्षा टिप्स

  • {'tip': 'पाठ के पात्रों के नाम और उनके आपसी संबंधों को अच्छे से याद रखें।'}
  • {'tip': "शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' के प्रतीकात्मक अर्थ को परीक्षा में उदाहरण सहित लिखें।"}
  • {'tip': 'व्याकरण भाग में अव्यय और उनके भेदों का अभ्यास जरूर करें।'}

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस पाठ के लेखक कौन हैं?

इस पाठ के लेखक प्रसिद्ध नाटककार जगदीशचंद्र माथुर हैं।

'रीढ़ की हड्डी' किस विधा की रचना है?

यह एक 'एकांकी' (एक अंक का नाटक) है।

उमा ने अंत में क्या सच्चाई उजागर की?

उमा ने बताया कि वह बी.ए. पास है और शंकर के चरित्र की पोल खोलते हुए उसे आइना दिखाया।

ये नोट्स बालभारती हिंदी लोकभारती पाठ्यपुस्तक (2026-27) से AI की सहायता से तैयार किए गए हैं और पाठ्यपुस्तक से जाँचे गए हैं।

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