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Samta Ki Or Notes, Summary, Questions | Class 10 SSC Hindi

Doubtly 1 min read Updated 25 Oct 2026 Save WhatsApp
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यह कविता 'समता की ओर' छायावाद के प्रतिष्ठित कवि मुकुटधर पांडेय द्वारा रचित है। इस पद्य में शिशिर ऋतु की अत्यधिक ठंड और समाज में धनवान तथा अभावग्रस्त लोगों के जीवन में व्याप्त भारी अंतर का सजीव चित्रण किया गया है।

रचनाकार परिचय

मुकुटधर पांडेय का जन्म सन १८९५ में बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में हुआ था तथा मृत्यु सन १९८९ में हुई। आपने बारह वर्ष की अल्पायु से ही लिखना शुरू कर दिया था और आपकी रचनाओं में मानव प्रेम, प्रकृति सौंदर्य तथा गीतात्मकता प्रमुखता से दिखाई देती है।

सारांश

कविता की शुरुआत 'हेमंत भ्रात' के बीतने और शिशिर ऋतु के आगमन से होती है।

रात के समय लोग अपने घरों में सोते हैं, जबकि बाहर कुत्ते और सियार ठंड के मारे रोते और चिल्लाते हैं। अर्धरात्रि में सूने आकाश को देखकर ऐसा भय प्रतीत होता है मानो किसी राज्य पर कोई बड़ा राष्ट्रीय संकट आ गया हो।

समाज के धनवान लोगों के लिए रात-दिन मौज-मस्ती होती है और उनके जीवन में हर तरह के सुख होते हैं, जबकि दीन-दरिद्रों के हिस्से में केवल शिशिर ऋतु के सारे कष्ट आते हैं। अमीर लोग हलुआ-पूड़ी और दूध-मलाई जैसे स्वादिष्ट भोजन खाते हैं, वहीं गरीबों को सूखी रोटी और भाजी तक नसीब नहीं होती।

अमीर लोग रंग-बिरंगी और कीमती शाल-दुशाले ओढ़कर सुख से रहते हैं, जबकि गरीबों के कांपते शरीरों पर लगातार पाले गिरते हैं। उनके टूटे-फूटे घरों में हमेशा उदासी छाई रहती है क्योंकि वे सभी सुख-साधनों से वंचित होते हैं।

अंतिम पंक्तियों में कवि याद दिलाता है कि पहले प्रकृति हमारी माता के समान सबका समान पालन करती थी और पेट भरने की कोई चिंता नहीं सताती थी। इसलिए हमें यह विचार करना चाहिए कि क्या समाज में एक भाई का दूसरे भाई पर कोई अधिकार और उपकार नहीं है।

माइंड मैप

समता की ओर

  • शिशिर ऋतु का प्रभाव
    • प्रकृति हुई द्‌युतिहीन
    • अवनि में छाई कुंंझटिका
    • तालों में बिलखाते पद्‌मदल
  • रात का दृश्य
    • लोग घरों में सोते हैं
    • श्वाहन और सियार रोते हैं
    • चंद्रमा ने पाया पांडुवर्ण
  • धनियों का जीवन
    • रात-दिन उनके पौ-बारे
    • हलुआ-पूड़ी और दूध-मलाई
    • ओढ़ें शाल-दुशाले
  • गरीबों की स्थिति
    • शिशिर दुख के भागी
    • सूखी रोटी का अभाव
    • टूटे-फूटे घरों में उदासी
  • कवि का संदेश
    • प्रकृति थी माता समान
    • भाई पर भाई का अधिकार
    • मानव समानता की भावना

कविता का विकास क्रम

  1. शिशिर ऋतु का आगमन और प्रकृति तथा तालाबों की स्थिति का वर्णन
  2. सर्दी की रात का सन्नाटा और पशुओं का रोना
  3. आकाश और चंद्रमा की मलीन दशा का चित्रण
  4. धनवान लोगों के सुख-वैभव और खान-पान का विवरण
  5. निर्धन वर्ग की लाचारी, ठंड और भुखमरी का यथार्थ
  6. प्रकृति के शुरुआती पालनहार रूप का स्मरण
  7. मानवीय बंधुत्व और सामाजिक समानता का संदेश

विषय और संदेश

सामाजिक विषमता

समाज में धनवानों और अभावग्रस्त गरीबों के बीच के अंतर को स्पष्ट करना, जहाँ एक तरफ विलासिता है और दूसरी तरफ जीवन की बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष।

मानवीय बंधुत्व

सभी मनुष्य आपस में भाई-समान हैं, इसलिए धनवानों का यह कर्तव्य है कि वे अपने गरीब भाइयों के दुख-दर्द को समझें और उनकी सहायता करें।

याद रखने योग्य मुख्य बिंदु

  • शिशिर ऋतु के कारण प्रकृति की चमक समाप्त हो जाती है और चारों ओर कुहासा छा जाता है।
  • अत्याचारी राजा के दंड के समान कमल दल ठंड से प्रताड़ित होते हैं।
  • धनी लोग हर प्रकार के सुख-साधनों से संपन्न हैं और स्वादिष्ट भोजन खाते हैं।
  • गरीबों और दीन-दरिद्रों के जीवन में ठंड के कारण केवल दुख और उदासी होती है।
  • कवि ने समाज में समानता लाने और एक-दूसरे के प्रति कर्तव्य निभाने की प्रेरणा दी है।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
द्‌युतिहीनतेजहीन (lacking radiance)
अवनिपृथ्वी, धरती (earth)
कुंंझटिकाकुहासा, कोहरा (fog/mist)
तुषारबर्फ, हिम (frost/snow)
पद्‌मदलकमल के पत्ते (lotus petals)
श्वाहनकुत्ता (dog)
स्यारगीदड़, सियार (jackal)
पांडुवर्णपीला रंग (pale color)
पौ-बारे होनालाभ होना, मजे होना (to have a great time/profit)
दुशालेबड़ी चादरें या शाल (shawls)

अलंकार और काव्य सौंदर्य

अलंकार/विशेषताउदाहरणस्पष्टीकरण
मानवीकरणपद्‌मदल तालों में बिलखातेयहाँ कमल के पत्तों पर मानवीय भावना (बिलखना/रोना) का आरोप किया गया है।
उत्प्रेक्षा अलंकारमानो किसी राज्य पर है, राष्‍ट्रीय कष्‍ट कुछ आयाचंद्रमा के पांडुवर्ण होने की तुलना राष्ट्रीय कष्ट आने की संभावना से की गई है जहाँ 'मानो' शब्द का प्रयोग हुआ है।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

Q1. शिशिर ऋतु में प्रकृति और वातावरण में क्या-क्या परिवर्तन आते हैं?

शिशिर ऋतु के आने से प्रकृति की चमक चली जाती है और धरती पर कोहरा छा जाता है। तालाबों में कमल के पत्ते ठंड से ऐसे बिलखाते हैं जैसे किसी अत्याचारी राजा के दंड से लोग दुखी होते हैं। रात के समय चारों ओर सन्नाटा होता है और बाहर कुत्ते तथा सियार रोते हैं।

Q2. धनवान और दीन-दरिद्र व्यक्तियों की जीवनशैली में क्या अंतर दिखाई देता है?

धनवान लोग रात-दिन मौज-मस्ती में रहते हैं, हलुआ-पूड़ी और दूध-मलाई खाते हैं तथा कीमती शाल-दुशाले ओढ़ते हैं। इसके विपरीत, दीन-दरिद्रों को सूखी रोटी और भाजी भी नहीं मिलती, उनके टूटे-फूटे घरों में उदासी छाई रहती है और ठंड के पाले उनके कांपते शरीरों पर गिरते हैं।

Q3. अंतिम दो पंक्तियों से कवि क्या संदेश देना चाहता है?

अंतिम पंक्तियों के माध्यम से कवि यह संदेश देना चाहता है कि पहले प्रकृति हमारा समान रूप से पालन करती थी। समाज के सभी मनुष्य आपस में भाई हैं, इसलिए एक भाई का दूसरे भाई पर अधिकार और कर्तव्य बनता है कि वह उसके दुखों को दूर करे।

Q4. कृति पूर्ण कीजिए: शिशिर ऋतु में प्रकृति में होने वाले परिवर्तन लिखिए।

प्रकृति में होने वाले परिवर्तन: (१) प्रकृति का द्‌युतिहीन होना, (२) अवनि में कुंझटिका का छा जाना।

Q5. तालिका पूर्ण कीजिए: शिशिर ऋतु में धरती पर होने वाले परिवर्तन लिखिए।

धरती पर होने वाले परिवर्तन: (१) तालों में पद्‌मदल का बिलखाना, (२) पाले का गिरना।

Q6. जीवन शैली में अंतर स्पष्ट कीजिए: धनी व्यक्ति और दीन-दरिद्र।

धनी व्यक्ति सुख-साधनों से पूर्ण घरों में रहते हैं और स्वादिष्ट भोजन खाते हैं, जबकि दीन-दरिद्र टूटे-फूटे घरों में रहते हैं और उन्हें सूखी रोटी भी कठिनाई से मिलती है।

Q7. पद्य विश्लेषण के मुददों के उत्तर दीजिए: रचनाकार, रचना का प्रकार और रचना से प्राप्त संदेश।

१. रचनाकार: मुकुटधर पांडेय, २. रचना का प्रकार: कविता, ३. रचना से प्राप्त संदेश: समाज में अमीरों और गरीबों के बीच की खाई को मिटाकर आपसी भाईचारा और समता का भाव अपनाना चाहिए।

Q8. चंद्रमा और तारों की स्थिति को देखकर कवि के मन में क्या विचार आता है?

तारे बहुत मलीन पड़ जाते हैं और चंद्रमा अपना पीला रंग (पांडुवर्ण) पा लेता है, जिसे देखकर कवि को ऐसा प्रतीत होता है मानो किसी राज्य पर कोई बड़ा राष्ट्रीय संकट आ गया हो।

परीक्षा टिप्स

  • कवि मुकुटधर पांडेय का परिचय (जन्म वर्ष, रचनाएँ) अच्छी तरह याद रखें, क्योंकि यह बहुविकल्पीय या एक वाक्य के प्रश्नों में पूछा जा सकता है।
  • धनवानों और गरीबों की जीवनशैली की तुलना करने वाले बिंदुओं को अपने उत्तरों में स्पष्ट रूप से लिखें।
  • मानवीकरण और उत्प्रेक्षा अलंकारों के उदाहरणों को पद्यांश के संदर्भ में समझकर अभ्यास करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कविता 'समता की ओर' के रचनाकार कौन हैं?

इस कविता के रचनाकार छायावादी कवि मुकुटधर पांडेय जी हैं।

शिशिर ऋतु में गरीबों की क्या दशा होती है?

शिशिर ऋतु में गरीबों को सूखी रोटी और भाजी भी नहीं मिलती, उनके पास ओढ़ने के लिए वस्त्र नहीं होते और उनके कांपते शरीरों पर पाले गिरते हैं।

इस कविता का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस कविता का मुख्य उद्देश्य समाज में आर्थिक असमानता को उजागर करना और मानव-मानव के बीच भाईचारे तथा समता का संदेश देना है।

ये नोट्स बालभारती हिंदी लोकभारती पाठ्यपुस्तक (2026-27) से AI की सहायता से तैयार किए गए हैं और पाठ्यपुस्तक से जाँचे गए हैं।

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