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2. (अ) निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए : (6 अंक)हरि विन कूण गती मेरी।तुम मेरे प्रतिपाल कहिये मैं रावरी चेरी।आदि-अंत निज नाँव तेरो ही मायें फेरी।बेर-बेर पुकार कहूँ प्रभु आरति है तेरी।यौ संसार बिकार सागर बीच में घेरी…

2. (अ) निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए : (6 अंक)

हरि विन कूण गती मेरी।
तुम मेरे प्रतिपाल कहिये मैं रावरी चेरी।
आदि-अंत निज नाँव तेरो ही मायें फेरी।
बेर-बेर पुकार कहूँ प्रभु आरति है तेरी।
यौ संसार बिकार सागर बीच में घेरी।
नाव फाटी प्रभु पाल बाँधो बूडत है बेरी।
बिरहणि पिवकी बाट जौवै राखल्यो नेरी।
दासी मीरा राम रटत है मैं सरण हूँ तेरी।

(1) कोष्ठक में दिए गए शब्दों में से उचित शब्द चुनकर लिखिए : (2)
(बिरहणि, हरि, मीरा, नाव, आरति)
(i) अपने आप को चेरी मानने वाली ........
(ii) मीराबाई का प्रतिपाल करने वाले ........
(iii) संसार विकार में घिरने वाली ........
(iv) पिवकी बाट देखने वाली ........

(2) निम्न शब्दों के अर्थ पद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए : (1)
(i) [तालिका — अर्थ | शब्द : दासी – ........ ; भगवान – ........]
(ii) पद्यांश में उल्लेखित शब्दयुग्म ढूँढ़कर लिखिए : (1)
(1) ........ (2) ........

(3) उपर्युक्त पद्यांश की अंतिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)

1 answer

Best answer

(1) (i) मीरा (ii) हरि (iii) नाव (प्रत्येक शब्द एक ही बार प्रयोग होने से; भाव की दृष्टि से संसार-सागर में घिरी स्वयं मीरा हैं) (iv) बिरहणि

(2) (i) दासी – चेरी; भगवान – हरि
(ii) (1) बेर-बेर (2) आदि-अंत

(3) मीरा कहती हैं कि यह संसार विकारों का सागर है और मैं उसके बीच घिरी हुई हूँ। मेरी नाव फट गई है, हे प्रभु! आप पाल बाँधकर डूबती नाव को बचाइए। विरहिणी मीरा अपने प्रियतम प्रभु की बाट देख रही है; हे प्रभु, मुझे अपने निकट (पास) रख लीजिए। दासी मीरा राम का नाम रटती है और आपकी शरण में है।

Doubtly AI · 25 Oct 2026 AI-verified · Oct 2026 Report
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